सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के लाभार्थियों को दवा देने के नाम पर विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का खेल अब नहीं चलेगा।
सीजीएचएस निदेशक ने आदेश जारी किए हैं कि विदेश से आयातित दवाएं तभी लिखी जाएं, जब भारत में उस दवा के समान सॉल्ट वाली कोई दूसरी दवा न बनती हो।
इसके साथ ही यह निर्देश भी जारी किए गए हैं कि जो दवा सीजीएचएस की किसी भी फॉर्मुलरी में नहीं है, उसका वितरण हफ्ते भर में इतना हो कि उसका कुल मूल्य 1500 रुपये से अधिक न हो।
सूत्रों के मुताबिक सीजीएचएस के लाभार्थियों को विशेषज्ञों से इलाज के लिए जब दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है तो तमाम मामलों में डॉक्टर विदेश से आयातित महंगी दवाओं का नाम लिख देते हैं जबकि भारत में उसी सॉल्ट की दवा दूसरे ब्रांड नेम से बनती और बिकती है।
कैंसर की ही दवा है, जिसे भारत में बनाने वाली कंपनी उसकी 60 गोलियां 12 हजार में बेचती है जबकि विदेश से आयातित उसी सॉल्ट की दूसरे ब्रांड नेम वाली दवा की 60 गोलियों के लिए तकरीबन 90 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
ऐसी दवाओं की आड़ में होने वाले खेल को रोकने के लिए सीजीएचएस निदेशक डॉ. शारदा वर्मा की तरफ से निर्देश जारी किए गए हैं कि विदेशों से आयातित दवाएं तभी लिखी जाएं, जब कोई इंडियन सब्टीट्यूट उपलब्ध न हो।
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत में जिन दवाओं के उपयोग के लिए मंजूरी दे रखी है, सिर्फ वही रेफर होगी।