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Lucknow News: सकते में डॉक्टर, कैंसर के मरीज में स्त्री और पुरुष दोनों के जननांग

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केजीएमयू।
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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में पेट दर्द की समस्या लेकर आए 35 वर्षीय रोगी का लिंग डॉक्टरों के लिए भी पहेली बन गया है। मरीज में स्त्री और पुरुष दोनों के जननांग मौजूद हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बचपन में ही सर्जरी करके मरीज को पूर्ण रूप से स्त्री या पुरुष बनाया जा सकता था। जांच में मरीज में कैंसर की पुष्टि हुई है। इसलिए अब पहले उसका इलाज जरूरी है।
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यूरोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. विश्वजीत सिंह ने बताया कि पूर्वांचल के जनपद का यह मरीज पेट में दर्द की समस्या लेकर आया था। जांच करने पर पता चला कि उसके वृषण (टेस्टिस) अंडकोष के बजाय पेट में थे। बचपन में सर्जरी कर उन्हें सामान्य अवस्था में लाने का विकल्प था, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे मामलों में वृषण सही स्थान पर न लाने पर उनमें कैंसर बन जाता है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। इसलिए मरीज की कीमोथेरेपी शुरू कर दी गई है। जांच करने पर देखा गया कि रोगी में पुरुष जननांग वृषण, प्रोस्टेट ग्रंथि और अर्ध विकसित शिश्न मौजूद था। इसके साथ ही मरीज में गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय भी थे, जो पूर्ण रूप से महिला होने की निशानी है।

कैंसर ठीक होने के बाद होगी सर्जरी

प्रो. विश्वजीत सिंह ने बताया कि पहली प्राथमिकता कैंसर का उपचार करना है। इस मामले में मरीज का पालन-पोषण पुरुष के रूप में हुआ है। इसलिए सर्जरी करके उसे पूर्ण रूप से पुरुष बनाया जाएगा।
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सही समय पर होती सर्जरी, तो नहीं झेलना पड़ता सामाजिक दंश
डॉक्टरों के अनुसार इस मामले में अगर घरवालों ने बच्चे के जन्म के बाद ही डॉक्टरों से संपर्क किया होता तो फिर आसानी से सर्जरी हो सकती थी। सर्जरी के माध्यम से घरवालों की इच्छा के अनुसार उसे पूर्ण बालक या बालिका बनाया जा सकता था। इसके बाद उसी हिसाब से उसका पालन-पोषण होता। सही समय पर सर्जरी न होने से रोगी ने इतने साल सामाजिक दंश झेला और इसी वजह से अब कैंसर पीड़ित भी हो गया।

छिपाएं नहीं जननांगों की विकृति पर लें डॉक्टर का परामर्श
जन्म के समय मां-बाप को बच्चे के जननांग संबंधी विकृति का पता तुरंत चल जाता है। सामाजिक लोकलाज के फेर में वे इसे छिपाने लगते हैं। उन्हें सोचना चाहिए कि समय के साथ ही यह विकृति सभी को पता चल जाएगी। इसके बजाय अगर डॉक्टर का परामर्श लिया जाता तो बच्चा सामान्य जीवन व्यतीत करता।
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