इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने लोहिया संस्थान के डॉक्टरों और स्टाफ को दोषी करार देते हुए 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। विधिक व्यय के भी दस हजार रुपये भी देने का आदेश है। 30 दिन में रकम न देने पर नौ प्रतिशत ब्याज के साथ जुर्माना लगाने का आदेश है।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अमरजीत त्रिपाठी और सदस्य प्रतिभा सिंह की खंडपीठ ने विकासनगर के जितेंद्र बहादुर सिंह की याचिका पर बृहस्पतिवार को यह फैसला सुनाया। याचिका में कहा गया कि जितेंद्र ने सांस लेने में दिक्कत और सीने में दर्द की शिकायत पर बेटी को 30 जनवरी 2020 को राम मनोहर लोहिया की इमरजेंसी में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने न ही उसकी सही तरीके से जांच की और न ही सही इलाज दिया। यह लापरवाही तब बरती गई जब उनकी बेटी में टीबी के भी लक्षण दिख रहे थे, लेकिन इसकी भी जांच नहीं की गई।
याचिका में राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के तत्कालीन निदेशक डॉ. एके सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विक्रम सिंह, जूनियर डॉक्टर सुजीत कुमार शाही, नर्स शिप्रा समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया गया। प्रकरण की जांच में आरोप सही पाए जाने पर इनके खिलाफ जुर्माना लगाया गया।