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मानसिक स्वास्थ्य के लिए रात की नींद जरूरी, विशेषज्ञ ने दी सलाह

Tue, 30 Jun 2020 04:59 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मानसिक स्वास्थ्य के लिए रात की नींद जरूरी है। रात में हर व्यक्ति के शरीर में मेडीटोनल हार्मोन रिलीज होता है। यह दिमाग को आराम देते हुए एक तरह से रिचार्ज करने का काम करता है। यही वजह है कि जो लोग नियमित तौर पर नाइट ड्यूटी करते हैं उन्हें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जल्दी आती है। यह कहना है मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सम्यक तिवारी का। वह सोमवार को अमर उजाला मेडिकल हेल्पलाइन में लोगों के सवालों का जवाब दे रहे थे। पेश हैं प्रमुख सवाल जिन्हें ज्यादातर लोगों ने पूछा।
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सवाल- मुझे दिन में हल्की झपकी आ जाती है और रात में नींद नहीं आती है। शरीर में दर्द बना रहता है और मानसिक उलझन रहती है। इससे बचने को क्या करें? - राजकुमार बालागंज, हरे राम फैजुल्लागंज
जवाब- प्रयास करें कि दिन में नींद न लें। शाम के वक्त बाहर नहीं जा सकते हैं तो छत पर टहलें। पैरों में दिक्कत नहीं है तो सीढ़ियां भी चढ़ सकते हैं। यदि लॉन है तो उसमें कुछ काम करते रहें। थकान लगेगी तो रात में अच्छी नींद आएगी। सोते वक्त मोबाइल या अन्य गजट को पास न रखें। रात में नींद ले लेने से मेडीटोनल हार्मोन रिलीज होता रहता है। इसकी वजह से सुबह ताजगी महसूस होती है। नींद की गोली भी डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही लें।
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सवाल- मेरा बच्चा पढ़ने में रुचि नहीं लेता है। क्या करें? - श्रेया सिंह गोमती नगर, सरोज बाला गोसाईंगंज
जवाब- रोज के हिसाब से बच्चे के सब्जेक्ट तय करें। धीरे-धीरे मोटिवेट करें। उसकी रुचि के क्षेत्र में ही आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। यदि बच्चा पढ़ने में मन नहीं लगा रहा है तो उसे सहानुभूति पूर्वक समझने की जरूरत है। संभव है कि उसमें किसी दूसरे तरह का टैलेंट हो। सिर्फ उसे पहचानने की जरूरत है।

सवाल- परिवार में कोई व्यक्ति डिप्रेशन में है तो इसका आंकलन कैसे करें? - नारायण सिंह गोमती नगर, प्रियंका चौधरी
जवाब- यदि परिवार का कोई सदस्य किसी भी काम में अचानक रुचि लेना छोड़ दे। अकेले में रहने लगे। थोड़े से काम के बाद थकान महसूस हो, एकाग्रता की कमी हो, अचानक रोने का मन करें और चिड़चिड़ापन बढ़े तो ये भी डिप्रेशन के लक्षण हैं। ऐसे में संबंधित व्यक्ति को मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए। कुछ दवाइयां और काउंसलिंग से धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो जाती है।
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तेजी से बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति

डॉ सम्यक तिवारी - फोटो : amar ujala
सवाल- आत्महत्या की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही। ऐसी स्थिति रोकने के लिए किस तरह की सावधानी की जरूरत है? - सौम्या पांडे गोमती नगर, सुदर्शन सिंह कृष्णानगर
जवाब- परिवार और समाज को जागरूक करने की जरूरत है। क्योंकि जब लोग खुद को अकेला मानने लगते हैं। हताश और निराश हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि उनकी उपयोगिता खत्म हो गई है। ऐसे में आत्महत्या की ओर कदम बढ़ते हैं, लेकिन यह क्षणिक होता है। यदि संबंधित व्यक्ति को कुछ पल के लिए रोक लिया जाए तो वह दोबारा आत्महत्या की ओर नहीं बढ़ता है। इसलिए परिवार के सदस्यों की मनोभावना को समझने की जरूरत है। जो लोग डिप्रेशन में दिखे उन्हें तत्काल मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। दो से तीन हफ्ते तक दवा लेने के बाद मनोभाव में बदलाव आने लगता है।

सवाल- मेरे दादाजी डिमेंशिया से पीड़ित है। वह पहले भी दो बार लापता हो चुके हैं। दोबारा ऐसी समस्या न होए, इसके लिए क्या सावधानी बरतें? - शांतनु आलमबाग, अल्ताफ  अहमद इस्माइल गंज
जवाब- डिमेंशिया में व्यक्ति तात्कालिक चीजें भूल जाता है और पुरानी चीजें याद रखता है। ऐसे में कुछ दवाएं दी जाती हैं। जो लोग गहरे डिमेंशिया की चपेट में हैं। उन्हें लापता होने से बचाने के लिए हाथों पर मोबाइल नंबर का टैटू बनवा दें। ऐसे में वे यदि खो जाएंगे तो हाथ पर टैटू के जरिए अंकित मोबाइल नंबर से कोई न कोई घर पर फोन करके सूचना दे देगा।
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