लखनऊ। केजीएमयू के कैंसर रोग विशेषज्ञ प्रो. सुधीर सिंह के मुताबिक ज्यादातर लोगों को लगता है कि बायोप्सी के बाद कैंसर तेजी से फैलता है। इस वजह से वे बायोप्सी नहीं कराते हैं। हकीकत में बायोप्सी कैंसर की सटीक पहचान के लिए जरूरी जांच है। इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। विश्व कैंसर दिवस पर मंगलवार को ओपीडी परिसर में उन्होंने यह जानकारी दी।
प्रो. सुधीर ने बताया कि बायोप्सी कराने की सलाह तब दी जाती है, जब शारीरिक परीक्षण के दौरान कुछ संदिग्ध दिखता है। यह एक मामूली सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें शरीर के प्रभावित हिस्सों से कोशिकाओं का नमूना लेकर उसकी जांच करके कैंसर की उपस्थिति का पता लगाया जाता है। बायोप्सी कैंसर की जांच और इलाज दोनों के लिए अहम है। इसकी जांच रिपोर्ट इलाज व उसके परिणामों की दिशा तय करती है।
कैंसर लाइलाज नहीं
डॉ. अनिमेष अग्रवाल के मुताबिक कैंसर लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर इसके लक्षणों को शुरुआती स्टेज में पहचान लिया जाए तो कैंसर को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। अधिकतर मरीजों में बीमारी का पता तीसरी और चौथी स्टेज में चलता है। लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में मुंह और गले के कैंसर के काफी मामले देखे जाते हैं। इसकी वजह तंबाकू और पान-मसाले का सेवन है। मुंह के छाले-घाव ठीक न होने, मुंह में सफेद, लाल धब्बे, भोजन निगलते समय दर्द आदि होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।