दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को दिल्ली सरकार की ओर से लखनऊ मेट्रो का काम करने के लिए हरी झंडी मिलने की उम्मीद पक्की होती जा रही है।
बीते रोज डीएमआरसी के एमडी मंगू सिंह ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की और उनको लखनऊ मेट्रो का काम करने संबंधित बातचीत की।
जिस पर केजरीवाल ने बहुत ही सकारात्मक रुख दिखाते हुए काम करने को लेकर सरकार की रजामंदी दे दी है।
जिसके बाद में उम्मीद की जा रही है कि, अगले कुछ दिन में डीएमआरसी की ओर से इसं संबंध में लिखित जानकारी लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को दे दी जाएगी।
इसके साथ ही 16 नवंबर को एलएमआरसी की अगली बोर्ड मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। इस बोर्ड मीटिंग में डीएमआरसी से काम लेने के संबंध में बड़ा फैसला किए जाने की उम्मीद की जा रही है।
यह अब लगभग तय होता जा रहा है कि, डीएमआरसी ही लखनऊ मेट्रो का काम करेगा। एमडी मंगू सिंह और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की लखनऊ मेट्रो को लेकर बीते रोज मुलाकात हुई थी।
इस बात को डीएमआरसी के जीएम एसडी शर्मा स्वीकार करते हैं, मगर उनका कहना है कि, वहां पर क्या बात हुई, इसकी जानकारी उनको नहीं हुई है।
मगर सूत्रों के मुताबिक, केजरीवाल से जब लखनऊ मेट्रो का काम करने के लिए निर्देशित करने को मंगू सिंह ने कहा तो सीएम राजी हो गए।
गौरतलब है कि, दिल्ली में विधानसभा चुनाव से कुछ पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक पत्र डीएमआरसी के एमडी को लिखा था कि, वे दिल्ली के बाहर कोई काम न करें।
मगर तब और अब की स्थिति बदल चुकी है। इसीलिए एमडी मंगू सिंह ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर के लखनऊ का काम करने के लिए रजामंदी ले ली है।
काम शुरू होने के एक साल में पूरे कॉरिडोर में निर्माण
काम शुरू होने को लेकर राजीव अग्रवाल ने बताया कि, मेट्रो के नार्थ साउथ कॉरिडोर का काम जब एक बार शुरू किया जाएगा, तो पूरा काम एक साल के भीतर शुरू हो जाएगा।
मिसाल के तौर पर अगर शुरुआत अमौसी से आलमबाग के बीच होगी तो अगले पड़ाव का टेंडर भी एक महीने बाद कर दिया जाएगा।
इसी तरह से एक साल में सारे टेंडर कर के पूरे कॉरिडोर का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसी तरह से प्रत्येक छह महीने से एक साल के अंतर पर काम अलग अलग खंड पर खत्म होता रहेगा।
मेट्रो डिपो में बनेगा 800 से 1000 मीटर का ट्रैक
मेट्रो डिपो के भीतर ही 800 से 1000 मीटर लंबा एक ट्रैक बनाया जाएगा। इस ट्रैक का इस्तेमाल रोलिंग स्टॉक के परीक्षण के लिए किया जाएगा।
शुरुआत में जब बोगियां आएंगी तो उनको सीधे ट्रैक पर नहीं उतारा जाएगा। उनका परीक्षण इसी ट्रैक पर होगा।
पिछले दिनों दिल्ली में डीएमआरसी और एलएमआरसी अधिकारियों के बीच जो बैठक हुई, उसमें यह जानकारी दी गई है।
एलएमआरसी के एमडी राजीव अग्रवाल का कहना है कि, यह ट्रैक बहुत जरूरी है।
32 वीं वाहिनी में ही बनेगा डिपो
एमडी राजीव अग्रवाल साफ कहते हैं कि, भले ही यात्रियों की संख्या मुंशीपुलिया की ओर से अधिक हो, मगर डिपो 32 वीं वाहिनी पीएसी की भूमि पर बनना ही संभव है।
इसकी असली वजह यह है कि, मुंशी पुलिया पर कहीं भी इतनी भूमि उपलब्ध नहीं है। यहां की भूमि प्राइवेट है।
जिसका अधिग्रहण कर पाना इतना आसान नहीं है। इसलिए डिपो बनाने के लिए श्रेष्ठ विकल्प 32 वीं वाहिनी पीएसी की भूमि ही है।
परियोजना को विवादित करने की हो रही साजिश
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट को परवान चढ़ने से पहले ही विवादित बनाने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं।
वाह्य सहायतित परियोजना सलाहकार मधुकर जेटली की मुख्यमंत्री को भेजी गई एक चिट्ठी के खुलासे के बाद इस तरह की कोशिशों को हवा मिल रही है।
जेटली की ओर से सीएम को एक पत्र भेजा गया, जिसमें लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन में भर्ती प्रक्रिया को अनियमित और गलत बताया गया।
शासन स्तर पर इस मामले की जांच शुरू किए जाने की भी बात सामने आई है। मगर मजे की बात यह है कि, एलएमआरसी में कोई भर्ती ही नहीं की गई है।
इसमें सभी कर्मचारी और अधिकारी प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन)पर लाए गए हैं। मधुकर जेटली अपने इस पत्र को लेकर कहते हैं कि, उनकी चिट्ठी की गलत व्याख्या कर दी गई है।
उनका कहना है कि, उन्होंने भर्ती घोटाला जैसी कोई बात नहीं कही है। जबकि, इस मुद्दे पर अधिक जानकारी देने की बात उनसे इस संवाददाता ने की तो उन्होंने मना कर दिया।
उन्होंने खुद को व्यस्त बताया। जबकि, एलएमआरसी के एमडी राजीव अग्रवाल का कहना है कि, कॉरपोरेशन में फिलहाल सभी कर्मचारी और अधिकारी डेपुटेशन पर आए हुए हैं।
पीडब्ल्यूडी, एलडीए और जिला प्रशासन से कर्मचारी और अधिकारी तैनात किए गए हैं। कोई भी भर्ती अब तक नहीं की गई है।