सीएम कार्यालय को भेजी शिकायत, जांच की मांग
परिवहन अधिकारियों की मिलीभगत से निजी एजेंसियां बेलगाम
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले 40 प्राइवेट कर्मियों से नाैकरी के नाम पर पहले तीन-तीन लाख रुपये निजी एजेंसियों ने वसूले। फिर जब कर्मचारियों ने महीने की सैलरी देने से इनकार किया तो उन्हें नाैकरी से निकाल दिया। पीड़ित कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। सीएम कार्यालय को शिकायत भेजी है और परिवहन अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही निजी एजेंसियों की लूट की जांच कराने की मांग की है।
मामला परिवहन विभाग से जुड़ा हुआ है। डीएल बनाने का काम प्रदेशभर में तीन एजेंसियों सिल्वर टच, फोकाम व रोजमार्टा को साैंपा गया है। जो प्राइवेटकर्मियों से डीएल बनाने व प्रिंटिंग का काम करवाते हैं। गत वर्ष नवंबर में प्रदेशभर के 320 प्राइवेटकर्मियों को दलाल करार दिया गया था, जिसके बाद निजी एजेंसियों ने उन्हें नाैकरी से निकाला। फिर उन्हें दोबारा नाैकरी पर रखा। नई भर्तियां भी कीं। इन सबमें एजेंसियों के साथ-साथ परिवहन अधिकारियों ने मोटी रकम वसूली। सूत्र बताते हैं कि प्रत्येक कर्मचारी से तीन-तीन लाख रुपये वसूले गए। खैर, कर्मचारियों ने जब काम करना शुरू किया तो एजेंसियों ने उनसे प्रतिमाह दी जाने वाली सैलरी के पैसे मांगे, जिसे दोबारा एजेंसी के एकाउंट से कर्मियों के खाते में भेजा जाना था। 40 कर्मचारियों ने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद सिल्वर टच, रोजमार्टा व फोकाम के प्रतिनिधियों ने इन कर्मचारियों को रडार पर लिया और नाैकरी से बाहर कर दिया। पीड़ित कर्मचारी मामले की शिकायत लेकर परिवहन आयुक्त कार्यालय पहुंचे थे, जहां अफसरों ने उनसे मिलने से मना कर दिया। वह मायूस वापस लाैटे। इसके बाद कर्मचारियों ने न्याय के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। सीएम कार्यालय को पत्र भेजकर पूरे मामले में अफसरों व निजी एजेंसियों के बीच संलिप्तता की जांच करने की मांग की है।
4.60 करोड़ दबाने के लिए सैलरी मांग रहे वापस
सिल्वर टच, रोजमार्टा, फोकाम एजेंसियों की ओर से प्रदेशभर में 320 प्राइवेटकर्मियों को नियुक्त किया गया है। इन्हें प्रतिमाह करीब 12 हजार रुपये सैलरी देने का प्राविधान है। लेकिन एजेंसियां सैलरी का पैसा कर्मचारियों से वसूल रही हैं। इससे प्रतिवर्ष 4.60 करोड़ रुपये बचाने की योजना है। जबकि यह पैसा एजेंसियों को कर्मचारियों को देना चाहिए। ऐसे में इतनी बड़ी धनराशि के बंदरबांट में परिवहन अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
सवाल: आखिर एजेंसी पर क्यों मेहरबान हैं अफसर
सूत्र बताते हैं कि निजी एजेंसियों के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रही हैं। लखनऊ ही नहीं प्रदेश के कई जिलों से ऐसी शिकायतें आईं, जिसमें जांच की मांग विधायकों, यहां तक कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की ओर से भी की गई। लेकिन पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि एजेंसी पर अफसर आखिरकार मेहरबान क्यों हैं।
सात महीने कराया काम, एक महीने की दी सैलरी
निजी एजेंसियों पर कर्मचारियों का आरोप है कि सात महीने से उनसे काम करवाया जा रहा है। लेकिन सैलरी सिर्फ एक महीने की दी गई है। लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि सैलरी का पैसा प्रतिमाह एजेंसी प्रतिनिधियों को दिया जाए, ताकि वे उसी धनराशि को कर्मियों के खाते में क्रेडिट कर सकें। ऐसा नहीं करने वाले कर्मचारियों को लगातार कंपनियां बाहर का रास्ता दिखा रही हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली एजेंसियों ने 40 कर्मियों से वसूले 1.20 करोड़, नाैकरी से भी निकाला