परिवहन विभाग में डीएल बनाने वाली एजेंसियों की कारस्तानी
डीएल बनाने वाले प्राइवेटकर्मियों से वसूली का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले प्राइवेटकर्मियों से वसूली के मामले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चाैधरी से लेकर विधायकों आदि की 32 शिकायतें दर्ज की गईं। डीएल बनाने वाली एजेंसियों के खिलाफ जांच-समितियां भी बैठीं, लेकिन नतीजे सिफर रहे। एजेंसियां बेरोकटोक वसूली में लगी हुई हैं। ऐसे में पीड़ित कर्मचारी मंगलवार को दोबारा परिवहन आयुक्त कार्यालय जाएंगे, जहां विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
फोकाम, सिल्वर टच एवं रोजमार्टा, इन तीन एजेंसियों को प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने एवं आवेदकों के घर तक डिलीवर करने की जिम्मेदारी साैंपी गई है। इन एजेंसियों ने 320 कर्मचारियों को तैनात किया है। जो आरटीओ में आने वाले आवेदकों के डीएल बनाने का काम करते हैं। परिवहन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से एजेंसी प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से कम्प्यूटर खरीदवाए। उनसे सैलरी का पैसा एडवांस में लिया। उन्हें नाैकरी देने के नाम पर मोटी रकम वसूली। गत वर्ष नवंबर से लेकर अब तक इन मामलों की तीन एजेंसियों के खिलाफ 32 शिकायतें दर्ज हुईं। इसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चाैधरी की शिकायत भी शामिल है। साथ ही सीतापुर, लखीमपुर, कानपुर, मैनपुरी, बहराइच, प्रयागराज सहित लगभग प्रदेशभर के जनप्रतिनिधियों ने पत्रों के मार्फत परिवहन विभाग से मामले की जांच कराने को कहा। कई मामलों में जांच समितियां बनाई गईं, लेकिन उनके नतीजे सिफर रहे। तीनों एजेंसियों की वसूली जारी है।
टीसी कार्यालय का कर सकते हैं घेराव
जिन कर्मचारियों को वसूली के बाद नाैकरी से निकाल दिया गया, वह मंगलवार को दोबारा परिवहन आयुक्त टीसी कार्यालय जाएंगे। जहां विरोध प्रदर्शन करेंगे। इतना ही नहीं नाराज कर्मचारी टीसी कार्यालय का घेराव भी कर सकते हैं।
अफसरों की मिलीभगत से हुआ खेल
प्राइवेटकर्मियों से वसूली के खेल में परिवहन विभाग के अफसर भी एजेंसियों से मिले हुए हैं। दरअसल, बीते नवंबर में एक आरटीओ की चिट्ठी के बाद ही यह खेल शुरू हुआ। पहले वर्षाें से तैनात कर्मचारियों को दलाल बताया गया, फिर उन्हें नाैकरी से निकाला गया और दोबारा नाैकरी पर रखने के लिए मोटी रकम वसूली गई। ऐसे में अफसरों की मिलीभगत की भी जांच होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
25 जिलों के डीएम को साैंपी थी जांच
पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने प्राइवेटकर्मियों से वसूली के मामले में 25 जिलों के डीएम को पत्र लिखे थे। उन्हें जांच करवाने को कहा था। सूत्र बताते हैं कि उसकी रिपोर्ट भी तैयार हुई। लेकिन उस पर क्या कार्रवाई हुई, यह अफसर बताने को तैयार नहीं है। रिपोर्ट को दबाने में पूरा अमला जुटा हुआ है।
इसलिए नहीं हुई कार्रवाई
सूत्र बताते हैं कि फोकाम, सिल्वर टच एवं रोजमार्टा के खिलाफ शिकायतों को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होने के पीछे मुख्य वजह अफसरों की मिलीभगत है। एक सेवानिवृत्त अपर परिवहन आयुक्त ने कर्मचारियों से नाैकरी दिलाने के लिए मोटी रकम वसूली। चूंकि अफसरों ने एजेंसियों के साथ मिलकर पूरा खेल रचा है, इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही। कार्रवाई होने पर परिवहन विभाग के आला अफसर भी घेरे में आएंगे।
इन मामलों की दर्ज हुईं शिकायतें
-निजी एजेंसियों की ओर से प्राइवेटकर्मियों से नाैकरी के नाम पर तीन से चार लाख रुपये वसूले गए।
-फोकाम नेट प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व प्रतिनिधि एसएन पांडेय ने 15 कर्मियों से 45 लाख वसूले। फिर उन कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया।
-हाल ही में निजी एजेंसियों की ओर से 40 कर्मियों को बाहर निकाला गया, जिनसे नाैकरी के नाम पर 1.20 करोड़ रुपये वसूले गए थे।
-एजेंसियों ने कर्मचारियों से कम्प्यूटर खरीदवाए, यूपीएस मंगवाए और उसकी बिलिंग कंपनी के नाम पर करवाया।
-प्राइवेटकर्मियों से उनकी सैलरी का पैसा मांगा जा रहा है। जो वापस एजेंसी की ओर से उन्हें सैलरी के रूप में क्रेडिट किया जाएगा।
-सात महीने से कर्मचारियों को सैलरी नहीं दी गई। इसकी शिकायत भी दर्ज हुई है।