योगी सरकार दीपोत्सव पर्व पर त्रेतायुग में प्रभु राम की अयोध्या वापसी के समय का माहौल बनाने की तैयारी में है। जिला प्रशासन, नगर निगम और अवध विवि इस बार रामनगरी में 10 हजार से अधिक मंदिरों समेत घर-घर तीन दिन तक दीप जलाने की नई पहल शुरू करने जा रहा है। इसे लेकर लोगों में भी उत्साह है।
राम के अयोध्या लौटने की खुशी में इस बार 24 से 26 अक्तूबर तक रामनगरी में भव्य दीपावली मनाई जाएगी। पहले जहां दीपोत्सव केवल एक दिन राम की पैड़ी पर फोकस करके आयोजित किया जाता था, वहीं इस वर्ष उत्सव को पूरे शहर में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
दीपोत्सव कार्यक्रम को अयोध्या के गुप्तारघाट से लेकर भरत जी की तपस्थली नंदीग्राम तक फैलाया जा रहा है। रामनगरी में तीन दिनों तक घर-घर दीप जलेंगे। प्रशासन ने अयोध्यावासियों को दिव्य दीपोत्सव से जोड़ने की नई पहल की है। इसके तहत 10 हजार मंदिरों समेत सभी घरों में दीप जलाने की तैयारी है।
नया विश्व रिकॉर्ड रचने से अलग होगा मंदिरों का दीपोत्सव
जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद माता सीता, भाई लक्ष्मण समेत पूरी सेना के अयोध्या वापसी की खुशी में त्रेतायुग में जो माहौल था, उसी दृश्य को उतारने की तैयारी है। राम की पैड़ी व सरयू घाटों पर 3 लाख 21 हजार दीप जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनेगा।
इसके अलावा सरयू घाट, गुप्तारघाट, भरतकुंड सहित रामनगरी के 13 बड़े मंदिरों पर इस वर्ष दीप जलाकर राम के अयोध्या आगमन की खुशी मनाई जाएगी। यहां के लिए अधिकारियों की तैनाती की गई है। डीआईओएस शिक्षकों व बच्चों के साथ व्यवस्था संभालेंगे। इसके अतिरिक्त इस वर्ष रामनगरी के घर-घर में दीप जलाने की अपील की जाएगी। कनकभवन, हनुमानगढ़ी, दशरथमहल, मणिरामदास की छावनी, छोटी देवकाली, गुप्तारघाट, भरतकुंड सहित अन्य मंदिरों में 5001 दीप जलाए जाएंगे।
प्रशासन, महापौर, अवध विवि की मुहिम से लोगों में उत्साह
दीपोत्सव में अभी करीब 20 दिन शेष हैं लेकिन इस बार आम लोगों में भी दीपोत्सव को लेकर उत्साह दिख रहा है। इस वर्ष दीपोत्सव में आमजन की भागीदारी अधिक से अधिक हो सके इसका प्रयास किया जा रहा है। जिला प्रशासन, महापौर अयोध्या नगर निगम व अवध विश्वविद्यालय की इस नयी पहल से लोग उत्साहित नजर आ रहे हैं।
नगर निगम द्वारा जहां अयोध्या महानगर इलाके में घर-घर दीप जलाने की अपील की जाएगी वहीं प्रशासन व अवध विश्वविद्यालय के प्रयास से स्कूल-कॉलेजों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में समाजसेवी संस्थाएं भी आगें आ रही हैं जो कि उत्साहवर्धक है।
पांच देशों की रामलीला और लोककलाएं होगी आकर्षण का केंद्र
दीपोत्सव के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने का प्रयास है। इस वर्ष पांच देशों के रामलीला कलाकार अपनी-अपनी शैली में राम की गाथा का मंचन करेंगे। मॉरिशस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सूरीनाम व नेपाल देशों की रामलीला मंडली के कलाकार अपने देश की शैली के माध्यम से रामलीला का मंचन रामनगरी में करेंगे।
दीपोत्सव में देश के कोने-कोने से करीब 32 सांस्कृतिक दलों को कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जा रहा है। पिछले साल करीब 25 सांस्कृतिक दल थे। साकेत महाविद्यालय से शोभायात्रा निकलेगी जिसमें विभिन्न प्रांतों के कलाकार अपने प्रदेश की लोकशैली का नृत्य प्रस्तुत करेंगे। साथ ही रथों पर मंचीय शैली के रंगारंग कार्यक्रमों शोभायात्रा का आकर्षण होगा।
हुनर दिखाएंगे श्रीलंका समेत भारत के कलाकार
दीपोत्सव में श्रीलंका सहित भारत के विभिन्न प्रांतों से विख्यात कलाकार भी अपनी कला का हुनर दिखाएंगे। इस बार श्रीलंका सहित भारत के कई प्रांतों के जाने-माने चित्रकारों को आमंत्रित किया गया है। आंध्रा की चोरियाल, बंगाल की टेटुआ, उड़ीसा की पट्टशैली व बिहार की मधुबनी शैली की पेंटिंग आकर्षण का केंद्र होगी। सभी कलाकारों अपनी चित्रकला के माध्यम से राम की गाथा को उकेरेंगे। इन चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी जो कि दीपोत्सव की भव्यता बढ़ाने का काम करेगी।