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बेटी को कामयाब बनाने के लिए एक पिता ने लगा दिया सब कुछ दांव पर

Sat, 14 Apr 2018 03:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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दिव्या काकरान - फोटो : डेमो
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अपने दमदार प्रदर्शन से बेहद कम समय में सुर्खियां बटोरने वाली यूपी की दिव्या काकरान ने राष्ट्रमंडल खेलों के कुश्ती (68 किग्रा) में कांस्य अपने नाम कर लिया।
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अपने भाई देव के त्याग को सबसे अहम बताते हुए 19 साल की पहलवान ने कहा कि लखनऊ साई सेंटर में ट्रेनिंग के दौरान भाई अलग कमरा लेकर रहता था ताकि मेरी ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं रह जाए।

ट्रेनिंग के बाद खाली समय में हम मिलकर कुश्ती पर चर्चा करने के अलावा आपस में मैच भी खेलते थे, जिससे मेरे प्रदर्शन में सुधार आया। मुजफ्फनगर के पुरवालिन गांव की रहने वाली दिव्या अपने पिता सूरजवीर पहलवान को अपना आदर्श बताते हुए कहती हैं कि कॅरिअर के शुरुआती दिनों में मुझे राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए पिता ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया।
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रोशन करना चाहती हैं देश का नाम

दिव्या काकरान - फोटो : डेमो
ये उनके परिश्रम का फल है, जो आज राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीत पाई हूं। उन्होंने कहा कि अलका तोमर दीदी का भी मेरे कॅरिअर को संवारने में अहम योगदान रहा।

अब मेरा एकमात्र लक्ष्य अलका दीदी के ओलंपियन न बन पाने के ख्वाब को पूरा करना है। मैं न सिर्फ टोक्यो ओलंपिक में खेलना चाहती हूं, बल्कि पदक जीतकर देश और यूपी का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना चाहती हूं।

सफलता के रथ पर सवार पूजा

पूजा - फोटो : डेमो
लखनऊ में ट्रेनिंग पूरी कर रवाना होने ने पहले पूजा ने कहा था मुझे अपनी सफलता के सिलसिले को कायम रखते हुए देश के लिए पदक जीतना है और इसके लिए जो बन पड़ेगा वो करूंगी।

राष्ट्रमंडल खेलों से पहले प्रो रेसलिंग लीग में दिग्गजों को धूल चटाने वाली पूजा डांडा को गोल्ड कोल्ट राष्टमंडल खेलों में पदक का तगड़ा दावेदार माना जा रहा था।

उन्होंने दमदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई, लेकिन यहां लंबी कद की नाइजीरियाई ओडूनोया के खिलाफ 5-7 के स्कोर से मुकाबला गंवा बैठी। बावजूद इसके पूजा के प्रदर्शन को देश को अहम रजत पदक मिला।
 
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लखनऊ बनता जा रहा लकी

- फोटो : डेमो
मैंने पहले भी कहा था कि भारतीय महिला कुश्ती टीम से खेलने गए सभी छह खिलाड़ी पदक जीतकर लौटेंगे। शुरुआती दो दिनों में चार खिलाड़ियों ने दो रजत और दो कांस्य जीत लिए है।

तीसरे दिन विनेश और साक्षी मलिक को अपनी चुनौती पेश करनी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि अगर सब कुछ आशा के अनुरूप रहा तो ये दोनों स्टार पहलवान देश को स्वर्ण पदक दिलाएंगे।

वह चाहे कैडेट हो, जूनियर अथवा सीनियर। भारतीय कुश्ती संघ ने महिला पहलवानों के लिए लखनऊ साई सेंटर को हब बना दिया। राष्ट्रमंडल खेलों में महिला पहलवानों की सफलता ने यह साबित कर दिया कि कहीं न कहीं लखनऊ इन महिला पहलवानों के लिए लकी है।

साई सेंटर की कार्यकारी निदेशक रचना गोविल बताती हैं कि हम बहुत खुश है कि यहां पर ट्रेनिंग करने वाली महिला पहलवानों ने देश के लिए राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीता।

भारतीय कुश्ती संघ से हमारा अच्छा तालमेल है। साथ ही खिलाड़ियों ने भी यहां रहकर काफी मेहनत की। मेरी ओर से सभी पदक विजेता महिला पहलवानों को बहुत-बहुत बधाई। 
 
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