ग्राम पंचायतों के लिए पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीद में अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी की अध्यक्ष व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रेणुका कुमार ने मुख्य सचिव आर.के. तिवारी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
एसआईटी को 28 जिलों में ज्यादा गड़बड़ी मिली हैं। इनमें पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर को बाजार दर से काफी ज्यादा रेट में खरीदा गया है। एसआईटी ने कहा है कि मेडिकल किट की खरीद के लिए शासन या विभाग के स्तर पर कोई संस्था, क्रय की प्रक्रिया का निर्धारण नहीं किया। कई जगह ऐसे बिल वाउचर मिले हैं, जिन पर जीएसटी नंबर ही नहीं है। एसआईटी ने इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करके हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर खरीदने के आदेश दिए थे। इनकी खरीद में अनियमितता की शिकायत होने पर 7 सितंबर को सुल्तानपुर व गाजीपुर के जिला पंचायतराज अधिकारी निलंबित कर दिए गए थे।
सत्ता पक्ष के विधायक ने ही मेडिकल किट खरीद में घोटाले का आरोप लगाया था इसलिए 10 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपर मुख्य सचिव राजस्व एवं बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार की अध्यक्षता में पूरा मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।
एसआईटी के अन्य सदस्य आईएएस अधिकारी अमित कुमार गुप्ता और विकास गोठलवाल थे। एसआईटी को पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीद में बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिली है।
मिर्जापुर, सोनभद्र, मैनपुरी, फर्रूखाबाद, सुल्तानपुर, झांसी, कौशांबी, चित्रकूट व गाजीपुर समेत 28 जिले ऐसे हैं, जहां बाजार रेट से काफी ज्यादा दर पर मेडिकल किट खरीदी गईं। फर्रूखाबाद का ही उदाहरण लें को मेडिकल उपकरण अलग-अलग पंचायतों में 1500, 2500 रुपये लेकर 11 हजार रुपये तक में खरीदे गए हैं। अधिकतर जिलों में 2500 रुपये लेकर 6000 हजार रुपये के बीच किट खरीदी गई हैं जबकि इनकी औसतन कीमत 1955 रुपये आंकी गई है।