लखनऊ। गोमतीनगर स्थित भरवारा रेलवे क्रॉसिंग पर बहुप्रतीक्षित ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण के मामले में हाईकोर्ट ने ने विस्थापन और मुआवजे की प्रक्रिया में हो रही देरी पर आश्चर्य जताते हुए अगली सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह में तय की है। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ को बताया कि जिलाधिकारी ने एक समिति गठित की है।
यह समिति यह आकलन करेगी कि जमीन अधिग्रहण के कारण कितने लोग विस्थापित होंगे और क्या वे 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत लाभ पाने के पात्र हैं। सरकारी पक्ष के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने का समय लग सकता है।
समिति गठन की बात पर अदालत ने टिप्पणी की कि इसका सीधा अर्थ है कि दो महीने तक जमीन का अवार्ड (मुआवजा निर्धारण) घोषित नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि निर्माण में देरी के बावजूद विस्थापन के आकलन की प्रक्रिया अब इस स्तर पर शुरू की जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह विस्थापन के प्रभाव और अन्य संबंधित मुद्दों का गहन परीक्षण करेगी।
इससे पहले सेतु निगम के अधिवक्ता ने कोर्ट को सूचित किया कि मुआवजे के लिए निगम की ओर से 27 करोड़ रुपये सरकारी कोष में पहले ही जमा कराए जा चुके हैं। जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि क्षेत्र की बड़ी आबादी को जाम से निजात दिलाने के लिए इस ओवरब्रिज का निर्माण जल्द पूरा होना अनिवार्य है।