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CM की फजीहत के बाद अब 'डैमेज कंट्रोल'

Mon, 16 Sep 2013 03:43 PM IST
नरेंद्र मिश्र/लखनऊ
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रविवार को मुजफ्फरनगर में हुई अलिखेश यादव की किरकिरी का असर राजधानी लखनऊ में भी दिखने लगा है।
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सरकार और जिला प्रशासन को डर सताने लगा है कि छोटी-छोटी घटनाओं को नजरअंदाज करना सरकार के लिए नासूर बन सकता है।

शायद यही वजह है कि आनन-फानन में सोमवार को यहां जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारियों को हुक्म दिया गया कि विवाद की छोटी-मोटी घटनाओं को भी पूरी गंभीरता से लिया जाए।

मंडलायुक्त संजीव सरन ने जिला प्रशासन के सभी अधिकारियों को हुक्म दिया है कि वे राजस्व विभाग से संपर्क करके जल्द से जल्द जमीन से जुड़े सभी विवादों की विवेचना कर उनका निपटारा करें। उन्होंने यह भी कहा कि इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए कि कानून व्यवस्था न बिगड़ने पाए।
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उन्होंने मामूली विवादों पर भी अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचने का हुक्म दिया है और त्वरित कार्रवाई करने को कहा है। मालूम हो कि जिला प्रशासन में छह सीएमओ हैं, जिन्हें अब अपने इलाकों में जाकर किसी भी विवाद का निपटारा करना होगा।

सीएम की 'प्राथमिकताओं' की भी आई याद
अखिलेश यादव ने बीते कुछ महीनों में तमाम योजनाओं के जरिए जनता को आकर्षित करने और लुभाने की जीतोड़ मेहनत की है। ऐसे में बीते दिनों मुजफ्फरनगर दंगों से सरकार की दागदार छवि को सुधारने की जुगत भी लगने लगी है। इसकी तस्दीक की संजीव सरन की एक बैठक में।
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सीएम के प्राथमिकता कार्यक्रमों की स्थिति पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई इस मीटिंग में सीतापुर, उन्नाव, लखनऊ और लखीमपुरखीरी के जिलाधिकारियों और सीडीओ को बुलाया गया। इस मीटिंग में मंडलायुक्त संजीव सरन ने सभी को सरकार की अधूरी जनहितकारी योजनओं को लागू करने का निर्देश दिया है।

इसमें लोहिया ग्राम, लोहिया आवास, स्वच्छता कार्यक्रम सहित करीब 99 कार्यक्रम शामिल हैं।
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