प्रदेश सरकार ने मनरेगा व अन्य परियोजनाओं में कार्यरत महिला श्रमिकों को निर्माण स्थल पर ही पोषाहार उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इसके तहत इन श्रमिक महिलाओं को आंगनबाड़ी पर मिलने वाली सभी सुविधाएं कार्यस्थल पर मुहैया कराई जाएंगी। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने ‘आंगनबाड़ी मोबाइल वैन सेवा’ शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
दरअसल, लॉकडाउन के चलते काफी संख्या में प्रवासी श्रमिकों की प्रदेश में वापसी हुई है। इनमें महिला श्रमिकों की भी संख्या काफी है। बहुत सी महिला श्रमिक अब अपने आसपास के इलाके में ही मजदूरी कर रही हैं। इनमें से काफी महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं। ज्यादातर धात्री व गर्भवती महिला भी मजदूरी कर रही हैं।
ऐसी स्थिति में इन श्रमिकों को बाल विकास विभाग की योजनाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों की सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके मद्देनजर सरकार ने कार्यस्थल पर ही सुविधाएं मुहैया कराने का फैसला किया है। खास तौर पर प्रदेश के 8 आकांक्षात्मक जिलों पर फोकस किया जाएगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली पोषण अभियान एवं राज्य पोषण मिशन की कार्यकारी समिति, राज्य स्तरीय सेक्शनिंग कमेटी (एसएलएससी), 5वीं स्टेट कनवर्जेन्स कमेटी ने जून में ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। प्रस्ताव के मुताबिक सभी मोबाइल वैन मोबाइल फोन से लैस रहेंगी, जिससे आवश्यकतानुसार महिला श्रमिकों द्वारा संपर्क किया जा सके।