लखनऊ। एसजीपीजीआई में संकाय सदस्यों (फैकल्टी) की भर्ती में नियमों की अनदेखी की जा रही है। इससे संकाय सदस्यों में आक्रोश है। उन्होंने संस्थान के निदेशक और राज्यपाल को पत्र सौंपते हुए नई भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संस्थान प्रशासन दो माह पहले दिए गए अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग के आदेश का भी पालन नहीं कर रहा है।
एसजीपीजीआई में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर मई में 17 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की गई है। शासन से 21 फीसदी अनुसूचित जाति, दो फीसदी जनजाति और 27 फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग की नियुक्ति का निर्देश है। आरोप है कि संस्थान ने नियमावली को दरकिनार कर दिया है। इसी तरह जून में 37 अन्य संकाय सदस्यों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया है। इसमें भी आरक्षण का निर्धारण नहीं किया गया है। ऐसे में एसजीपीजीआई अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश कुमार जयंत एवं महामंत्री मंजू सिंह ने निदेशक को पत्र भेज कर नियमों के तहत नियुक्ति प्रक्रिया अपनाने की मांग की है। साथ ही राज्यपाल से भी पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
सीधी भर्ती पर भी लग चुकी है रोक
इससे पहले फरवरी में 165 पदों पर भर्ती की जा रही थी। इसमें भी आरक्षण नियमों की अनदेखी की गई थी, जिसकी वजह से केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने 12 मार्च को निदेशक सहित अन्य को तलब किया था। सुनवाई के बाद आयोग ने नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का निर्देश दिया। साथ ही नए सिरे से आरक्षण नियमों का पालन करते हुए पदों की संख्या तय कर नियुक्ति नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा। इसके बाद संस्थान प्रशासन ने कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्ति का नया रास्ता निकाल लिया। मामले में एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान का कहना है कि यह कॉन्ट्रैक्ट नियुक्ति हो रही है। नियमों का पालन किया जा रहा है। स्थायी पदों पर आरक्षण निर्धारण कर जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी।