लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना संक्रमण के नए मामलों, मौत, डिस्चार्ज और सक्रिय केस को लेकर मंगलवार को जारी शीट में बड़ी गड़बड़ी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में एक भी मरीज डिस्चार्ज नहीं हुआ। इस दौरान 28 नए संक्रमित मिले, वहीं 10 मरीजों की मौत हो गई। इस आंकड़े के हिसाब से सक्रिय केस में 18 मरीजों का इजाफा होना चाहिए, लेकिन विभाग की ओर से जारी शीट में सक्रिय केस की संख्या बढ़ने के बजाय कम दिखाई गई है।
राजधानी में अप्रैल व मई में कोरोना संक्रमण चरम पर था और मौतों की संख्या भी बहुत ज्यादा थी। उसी समय से स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को शंका की निगाह से देखा जा रहा था। उस दौरान श्मशान घाटों पर एक-एक दिन में तीन-तीन सौ तक शवों का अंतिम संस्कार हुआ। इसके बावजूद सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक दिन में अधिकतम 65 मौत का आंकड़ा दर्शाया गया। यह आंकड़ा छह मई का था। वहीं, जून में जब संक्रमण कम होने से मौतों का ग्राफ भी गिर गया है तो डेथ ऑडिट के नाम पर पोर्टल पर मौतों की संख्या बढ़ाई जा रही है। यह सिलसिला पिछले एक सप्ताह से जारी है। इस समय जब मौतों की संख्या एक से दो रह गई है तो पिछली मौतों को शामिल कर रोजाना 10 के करीब संख्या दर्ज की जा रही है।
समझ से परे स्वास्थ्य विभाग का गणित
स्वास्थ्य विभाग रोजाना पूरे पदेश का जनपदवार ब्योरा जारी करता है। इसमें नए केस, डिस्चार्ज होने वाले, मौतों की संख्या, कुल मौत तथा सक्रिय केस की संख्या रहती है। सोमवार को इस शीट के अनुसार लखनऊ में संक्रमण के 17 नए मामले, 20 डिस्चार्ज, 12 की मौत तथा सक्रिय केस की संख्या 306 थी। इसके बाद मंगलवार को जारी शीट के अनुसार संक्रमण के 28 नए मामले, 10 की मौत दिखाई गई, जबकि एक भी मरीज गत 24 घंटे में डिस्चार्ज नहीं हुआ। इस हिसाब से आकलन करें तो सोमवार को 306 सक्रिय मरीज में मंगलवार के 18 नए मरीज जुड़ जाने से सक्रिय केस की संख्या 324 होनी चाहिए। लेकिन मंगलवार की शीट के अनुसार सक्रिय केस की संख्या बढ़ने के बजाय घटकर 293 ही रह गई। यह गणित समझ से परे है।
सरकारी आंकड़ों में दो महीने में 1268 मौत
लखनऊ में कोरोना संक्रमण से अब तक कुल मिलाकर 2547 मौत हुई हैं। इनमें से 1268 यानी आधे से ज्यादा लोगों की मौत सिर्फ अप्रैल व मई में हुई है। मई में 676 और अप्रैल में 592 मौतें हुई हैं।
जांच कराने की बात फिर नहीं उठाया फोन
सक्रिय केस की संख्या कम होने के बारे में जब सीएमओ डॉ. संजय भटनागर से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इसकी जांच कराने की बात कही। इस बारे में जब उनसे दोबारा बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं रिसीव किया।