लखनऊ। शिक्षा, सत्ता और संपत्ति पर महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिलने पर ही भेदभाव मिटाया जा सकता है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के जनसंपर्क विभाग की ओर से शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में इस पर चर्चा हुई।
संस्थान के संकायाध्यक्ष प्रो. शालीन कुमार ने कहा कि सिनेमा, पारिवारिक संस्कृति व समाज किसी भी व्यक्ति विशेष की सोच व व्यवहार को प्रभावित करता है। इसलिए लैंगिक भेदभाव खत्म करने के लिए इनमें बदलाव जरूरी है। डॉ. प्रेरणा कपूर ने कहा कि हमें सबसे पहले अपने अंदर बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। सुरक्षा नामक गैर सरकारी संगठन की मानद सचिव एवं संजय गांधी पीजीआई की इंटरनल कमेटी की सदस्य शालिनी माथुर ने कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा का तात्पर्य केवल साक्षर होना नहीं, बल्कि उनका बौद्धिक विकास व निर्णय लेने की क्षमता भी है। संचालन कुसुम यादव ने किया।