लखनऊ में पारा के सलेमपुर पतौरा गांव में प्रॉपर्टी डीलर संदीप पाल की हत्या कर फेंक दी गई थी। पारा पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि मुख्य आरोपी संतोष लोधी की तलाश कर रही है। पुलिस के मुताबिक संदीप की हत्या सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई में हुई है। संतोष लोधी कुछ दिन पहले हत्या के मामले में जेल गया था। उसे इस बात का मलाल था कि संदीप उसे जेल में सलाम ठोकने नहीं पहुंचा। इसी बात से नाराज होकर उसने हत्या की साजिश रची। जेल से निकलने के बाद हत्या कर दी। इसके बाद शव को संदीप के पारिवारिक दुश्मन अजीत पाल के दरवाजे पर फेंक दिया। ताकि पुलिस उसे गिरफ्तार करे। वहीं परिजन भी अजीत पर ही आरोप लगायें। पुलिस ने इस हत्याकांड में प्रयुक्त कार व पिस्तौल बरामद कर लिया है।
प्रभारी निरीक्षक पारा दधिबल तिवारी के मुताबिक काकोरी के नरौना गांव निवासी संदीप पाल कुछ साल पहले संतोष लोधी के साथ प्रॉपर्टी का काम करता था। संतोष कुछ दिन पहले हत्या के मामले में जेल चला गया। संतोष पर दर्जन भर से अधिक हत्या, हत्या के प्रयास सहित कई संगीन धाराओं में मुकदमें दर्ज हैं। जिसके कारण पूरे इलाके में दबदबा था। उसने कई गुर्गे भी पाल रखे थे। जो आसपास की जमीनों पर कब्जा करने और रंगदारी मांगने का काम करते थे। हत्या के मामले में वह कुछ दिन पहले जेल चला गया था। पुलिस की गिरफ्त में आये हत्या के चार आरोपी नरौना का मनीष गौतम, विकास गौतम और बादरखेड़ा पारा का सचिन रावत व एक नाबालिग शामिल है। चाराें ने पुलिस केसामने कुबूल किया कि हत्या की साजिश संतोष लोधी ने रची थी। उसे इस बात का मलाल था कि जब संतोष जेल में बंद था तो उस दौरान संदीप कभी उससे मिलने नहीं आया। न ही उसने कभी जेल में सलाम भेजा। वहीं जेल से रिहा होने के बाद भी वह दूरी बनाकर रखता था।
जेल से बाहर आने के चौथे दिन कर दी हत्या
प्रभारी निरीक्षक पारा दधिबल तिवारी के मुताबिक संतोष लोधी 18 जनवरी को जेल से जमानत पर रिहा हुआ। उसने जेल के अंदर ही हत्या की साजिश रच डाली थी। 22 जनवरी को संदीप के ही गांव के अपने खास गुर्गे मनीष गौतम के जरिए उसने बांगरखेड़ा में बुलाया। उसे जन्मदिन की पार्टी का बहाना बनाकर बुलाया था। मनीष अपने दोस्त विकास गौतम, सचिन रावत व एक नाबालिग के साथ बांगरखेड़ा गांव के खाली मैदान में पहुंचा। जहां कुछ देर बाद संतोष भी पहुंचा गया। सभी को संतोष ने शराब पिलाई। काफी नशे में होने के बाद मनीष की पिस्तौल से संदीप को गोली मार दी गई।
पुराने दुश्मन के दरवाजे पर फेंका था शव
प्रभारी निरीक्षक दधिबल तिवारी के मुताबिक पारा के पतौरा गांव निवासी अजीत पाल से संदीप के परिवार की पुरानी दुश्मनी थी। मनीष को इसकी पूरी जानकारी थी। इसलिए हत्या के बाद वह अल्टो कार से शव को पतौरा गांव लेकर गये। जहां अजीत के घर के पास शव फेंककर फरार हो गये। हत्यारोपियों ने वारदात में अजीत को फंसाने की पूरी साजिश रची थी। उनको पूरा विश्वास था कि पुरानी दुश्मनी का हवाला देकर पुलिस अजीत को गिरफ्तार कर लेगी। जिसके बाद उन सभी पर किसी को संदेह नहीं होगा।
मनीष के मोबाइल बंद होने पर गहराया संदेह
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक शव मिलने के बाद संदीप की कॉल डिटेल खंगाली गई। जिसमें आखिरी बार बातचीत मनीष गौतम से पाई गई। वहीं संदीप के भाई विक्रम ने भी मनीष व विकास के साथ पार्टी में जाने की बात कही गई। इस पर पुलिस ने मनीष के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो वह बंद आ रहा था। काफी प्रयास के बाद भी बात नहीं हो सकी। इस पर पुलिस को मनीष पर संदेह गहराने लगा। कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस ने मनीष, विकास, सचिन और उनके नाबालिग दोस्त को पकड़ लिया। मुख्य आरोपी संतोष अभी फरार है। मनीष के पास से वारदात में प्रयुक्त पिस्तौल और कार बरामद कर ली गयी है।