प्रदेश में दिव्यांगजन पेंशन योजना पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई है। प्रमाणपत्रों के भौतिक सत्यापन के नाम पर किसी आवेदक को परेशान किए जाने पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए अपर मुख्य सचिव, विकलांग कल्याण महेश गुप्ता ने सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रदेश में नवंबर में 47875 दिव्यांगजनों को पेंशन योजना में शामिल करने का लक्ष्य लिया गया है। तत्काल उनके खातों में पहली किस्त भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यहां बता दें कि प्रदेश सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले दिव्यांगजनों के लिए पेंशन योजना का लाभ देती है। पहले यह पेंशन 300 रुपये प्रति माह थी, जिसे योगी सरकार ने बढ़ाकर 500 रुपये प्रति माह कर दिया। बजट भी 333 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 575 करोड़ रुपये कर दिया गया है। 40 प्रतिशत या उससे अधिक विकलांगता वाले लोग इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
इधर, शासन को शिकायत मिली है कि दिव्यांगजन पेशन के लिए आवेदन करने वालों को प्रमाणपत्रों के भौतिक सत्यापन के नाम पर परेशान किया जा रहा है। नियमानुसार, आवेदकों से ऑनलाइन आवेदन लिया जा रहा है। इसके लिए उनसे दिव्यांगता का प्रमाणपत्र और आय प्रमाणपत्र मांगा जा रहा है। शासन की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि दिव्यांगता का प्रत्येक प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग और आय प्रमाणपत्र राजस्व विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
जांचकर्ता अधिकारी आवेदकों के प्रमाणपत्रों के नंबर का इन दोनों वेबसाइट्स पर उपलब्ध नंबर से मिलान करें। अगर ये नंबर मैच कर जाएं तो उन प्रमाणपत्रों को ‘ओके’ करते हुए अपनी रिपोर्ट लगा दें। साथ ही कहा गया है कि रिपोर्ट लगाने में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।