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Lucknow News: दिव्यांग बच्चे आज भी अधिकारों से वंचित

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लखनऊ। दिव्यांग बच्चे आज भी अधिकारों से वंचित हैं। यही वजह है कि इनके स्कूल जाने की संभावना 25 फीसदी कम हो जाती है। इनकी शिक्षा शुरू हो गई तो भी उच्च प्राथमिक स्तर तक इनका स्कूल छूटने की आशंका 27 फीसदी होती है। मंगलवार को गोमतीनगर स्थित होटल में कार्यशाला के दौरान यूनिसेफ उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. अमित मेहरोत्रा ने यह जानकारी दी।

देश में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर हुए आयोजन में डॉ. अमित ने बताया कि देश में अब भी 10 फीसदी बच्चे दिव्यांगता के साथ जी रहे हैं। इनके अधिकार सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हम सभी की है।
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यूनिसेफ उत्तर प्रदेश के प्रमुख डॉ. जकारी एडम ने कहा, यूनिसेफ ने भारत में वर्ष 1949 और यूपी में वर्ष 1973 से काम करना शुरू किया था। इसका मकसद हर बच्चे के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। भले ही कोई बच्चा दिव्यांग हो, लेकिन इससे उसके अधिकारों में कमी नहीं होनी चाहिए।

मौके पर वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्रा, शैलवी शारदा और शिल्पी सेन ने अरशाना अजमत के साथ बातचीत में बाल अधिकारियों के लिए मीडिया को जागरूक रहने की बात कही। कार्यक्रम में यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता, शिक्षा विशेषज्ञ ऋत्विक पात्रा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मनोज शुक्ल, महिला एवं बाल कल्याण विभाग के उपनिदेशक पुनीत मिश्र के साथ आरएन सिंह और ऋचा श्रीवास्तव थे।
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बच्चे बने मुख्य अतिथि, किया दीप प्रज्ज्वलन



समारोह को दिव्यांग बच्चों के नाम समर्पित करते हुए उन्हें मुख्य अतिथि बनाया गया। बच्चों ने दीप प्रज्ज्वलन किया। इनमें प्राथमिक विद्यालय नौबस्ता की आयुषी, कंपोजिट स्कूल कुशालगंज की दिलकश खान, प्राथमिक स्कूल हजरतगंज की कामिनी गुप्ता और उच्च प्राथमिक मलेशेमऊ के सादिक शामिल थे।
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