कुकरैल के लिए 20 करोड़ रुपये मंजूर
नदी में गिरने वाले सभी नालों का रुख मोड़ा जाएगा, तटों का भी सौंदर्यीकरण
कुकरैल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए इसमें गिरने वाले सभी नालों का रुख मोड़ा जाएगा। इसके लिए शासन ने करीब 20 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है, जो जल्द ही जारी होने वाला है। नाले डायवर्ट करने के बाद कुकरैल के तटों के सौंदर्यीकरण का काम शुरू होगा।
कुकरैल को गोमती की सहायक नदी माना जाता है। शहर के विस्तार के साथ कुकरैल नदी नाले में तब्दील हो गई है। इसमें शहर की जल निकासी के लिए बने नाले गिराए जाने लगे। इसे पुनर्जीवित करने की घोषणा नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने की थी। इसके बाद कार्ययोजना पर काम भी शुरू हो गया था, लेकिन कोराना संकट आने के कारण इस पर ब्रेक लग गया था। अब शासन फिर से इस योजना केे लेकर सक्रिय हुआ है। बीते सप्ताह शासन की ओर से नगर निगम से विस्तृत कार्ययोजना जल्द देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद अब शासन कुकरैल में गिरने वाले नालों को रोकने के लिए इन्हें डायवर्ट करने का काम शुरू करने जा रहा है।
कुकरैल में गिरते हैं 11 नाले
कुकरैल में इस समय 11 बड़े नाले गिर रहे हैं। ये नाले निशातगंज से लेकर इंदिरानगर के बीच गिरते हैं, जिससे कुकैरल नदी एक बड़ा नाला बनकर रह गई है। इसे फिर से नदी का स्वरूप देने के लिए नालों को गिरने से रोकने का काम किया जाएगा। इसके बाद नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़े जाने की योजना बन रही है। योजना को देख रहे पूर्व नगर आयुक्त व वर्तमान में विशेष सचिव नगर विकास इंद्रमणि त्रिपाठी कहते हैं कि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सबसे पहलेे नालों का गिरना रोका जाना जरूरी है। नाले गिरना बंद हो जाएंगे तो कुकरैल का पानी अपने आप ही साफ हो जाएगा।
तटबंध में बसी हैं कई बस्तियां
कुकरैल के किनारे कई बड़ी बस्तियां भी बसी हैं। तटबंध के सौंदर्यीकरण के लिए इन्हें विस्थापित भी किए जाने की योजना है। लॉकडाउन से पहले पेपर मिल कॉलोनी की एक बस्ती के जो मकान या दुकान कुकरैल तटबंध के दायरे में आ रहे थे, उन्हें तोड़ने के लिए चिह्नित करने का काम भी सरकारी विभागों की ओर से किया गया था। उन पर लाल निशान भी लगाए गए थे, लेकिन विरोध के कारण तटबंध के दायरे में आने वाले निर्माणों को उस समय तोड़ा नहीं जा सका था। पेपर मिल कॉलोनी के अलावा अयोध्या रोड पर भी नाले के किनारे बसी एक बड़ी बस्ती को भी विस्थापित करने की आवश्यकता होगी। इसे लेकर पूर्व में तैयारी भी की गई थी, लेकिन कोरोना के चलते उस पर काम बंद हो गया था।
नगर निगम तैयार करे कार्ययोजना
कुकरैल नदी को पुनर्जीवित करने की योजना का काम तेजी से किया जाना है। कोरोना संकट के चलते योजना के काम करने में रुकावट आई। इस पर तेजी से काम करने के लिए 20 करोड़ रुपये के बजट प्रस्ताव को भी उच्च स्तर से सहमति मिल गई है। प्रोजेक्ट पर जो काम होना है, उसे लेकर नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वह विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर जल्द भेजे।
- इंद्रमणि त्रिपाठी, विशेष सचिव नगर विकास