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सरकार की फिल्म नीति से बदल रही है यूपी की छवि: तिग्मांशू

Sat, 11 Jul 2015 02:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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‘इलाहाबाद की मेरी पैदाइश है। पर, लखनऊ के सिनेमाघरों में बचपन का काफी वक्त बीता। नोवेल्टी में ‘गुलामी’, ‘महान’ जैसी फिल्में देखी। उमराव, मेफेयर... क्या वक्त था उन सिनेमाघरों का। अब सब कुछ खत्म हो गया है।
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लखनऊ में सिंगल स्क्रीन थियेटर्स तो बचे ही नहीं। सरकार को चाहिए कि मेफेयर का पुराना लुक बरकरार रखते हुए उसे फिल्मों का म्यूजियम बना दे।

यह कहना है ‘पान सिंह तोमर’ जैसी फिल्म को निर्देशित कर चुके तिग्मांशु धूलिया का। वह शुक्रवार को अपनी नई फिल्म ‘मिलन टॉकीज’ के लिए लोकेशन तलाशने राजधानी आए थे। इस मौके पर ‘अमर उजाला’ से उन्होंने विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि यूपी की फिल्म नीति से सूबे की छवि भी बदल रही है।

‘मिलन टॉकीज’ में मोहब्बत की कहानी
तिग्मांशु अपने नए प्रोजेक्ट ‘मिलन टॉकीज’ के बारे में बताते हुए कहते हैं कि इस फिल्म में इलाहाबाद की मॉडर्न लव स्टोरी है। इसकी पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया व कम्युनिकेशन की खास भूमिका है।
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लखनऊ के पुराने टॉकीज, घरों व रेस्टोरेंट इत्यादि पर शूट करने की योजना है। इसलिए यहां लोकेशन तलाशने के लिए हूं। कलाकारों का चयन बाकी है। तिग्मांशु बताते हैं कि ‘पान सिंह तोमर’ की शूटिंग के दौरान इस फिल्म का आइडिया आया था।
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यूपी की इमेज बदलेगी फिल्म नीति

यूपी की फिल्म नीति की मुंबई में बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स लगाई जा रही हैं। इससे प्रदेश की इमेज बदल रही है। निर्माता-निर्देशक तेजी से यूपी का रुख कर रहे हैं। इतना ही नहीं सब्सिडी से छोटी या कम बजट की फिल्मों को शर्तिया फायदा मिलेगा।

आना ही पड़ेगा छोटे पर्दे पर
अनुराग कश्यप रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों को लेकर छोटे पर्दे पर आ रहे हैं। जावेद अख्तर और नसीरुद्दीन भी छोटे पर्दे का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे में जब इंडस्ट्री की बड़ी शख्सियतें टीवी पर आ रही हैं तो मैं भी इससे बचना नहीं चाहूंगा।

छोटे पर्दे पर तो आना ही पड़ेगा। फिलहाल नेताजी सुभाषचंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी पर सीरीज बना रहा हूं जो राज्यसभा टीवी पर प्रसारित हो रहा है।

फैशन सेंस नहीं है मुझे
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में विधायक रामाधीर सिंह का किरदार निभाने वाले तिग्मांशु स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि उन्हें फैशन सेंस नहीं है। इसलिए उन्हें साधारण कपड़ों में रहना पसंद हैं। तिग्मांशु मानते हैं कि फैशन सब्जेक्टिव मामला है और वे फिल्में बनाने में ज्यादा रुचि रखते हैं।
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