लखनऊ। स्मारक समिति के कर्मचारियों के पीएफ के 48 करोड़ रुपये के घोटाले में गोमतीनगर पुलिस ने मंगलवार को राइट पे कंपनी के डायरेक्टर मंगलेश सिंह को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को साजिश में शामिल मंगलेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। मंगलेश मेरठ रोड विकास कॉलोनी हरियाणा का रहने वाला है। अभी इस मामले में कुछ आरोपियों की तलाश की जा रही है। इस मामले में मास्टर माइंड स्मारक समिति के लेखाकार सहित राइट पे कंपनी समेत पुलिस अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
एसीपी गोमतीनगर श्वेता श्रीवास्तव के मुताबिक पिछले साल 16 सितंबर को एलडीए के सचिव पवन गंगवार ने गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। इसमें आरोप लगाया गया कि स्मारक समिति के कर्मचारियों के एफडी कराए गए धन से 10 करोड़ रुपये का गड़बड़झाला किया गया। इस मामले में सचिव ने दो लोगों को आरोपी बनाया। पुलिस की विवेचना के दौरान जिन लोगों के नाम सामने आए उनमें स्मारक समिति के लेखाकार विशालखंड गोमतीनगर निवासी संजय सिंह, चंद्रलोक कालोनी अलीगंज निवासी रविकांत पांडेय उर्फ मुकेश पांडेय, केरल के कैलूर अर्नाकुलम निवासी संदीप पुथनमाडम, कर्नाटक मैसूर हैबबाल निवासी दीपक यादवा, हरदोई के महेशपुर निवासी शैलेंद्र सिंह उर्फ शैलू, देवरिया के रामपुर कारखाना का रहने वाला आकाश कार्तिकेय और गोंडा के स्टेशन रोड का कृष्णमोहन श्रीवास्तव शामिल थे। इन सभी को पुलिस ने 7 मार्च को गिरफ्तार किया था। वहीं 8 मार्च को राइट पे कंपनी के मालिक सतीश चंद्र पांडेय को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस के मुताबिक स्मारक समिति के खाते से अचानक से अप्रैल 2021 से राइट पे कंपनी के खाते में एक-एक कर 35 करोड़ रुपये पहुंच गए। यह रकम स्मारक समिति के कर्मचारियों के पीएफ की थी। लेकिन इस जालसाजी की जानकारी सतीश को बैंक से कॉल आने के बाद हुई। खुद को बचाने के लिए संदीप व मंगलेश ने रुपये वापस कराने शुरू कर दिए। कंपनी के खाते का संचालन सतीश करता था। उसे बताया गया कि टर्नओवर दिखाने के लिए रुपये का अवागमन बना रहना चाहिए। इस लिए रुपये वापस बैंक के खाते में जमा करा दिया जाए। लेकिन इसके पहले ही संदीप व मंगलेश ने मिलकर कंपनी के खाते का 10 करोड़ रुपये अपने परिचितों के निजी व कंपनी केखातों में जमा करा दिया था, जो राइट पे के खाते में नहीं था। इसलिए यह रकम वापस नहीं आई।