शहर में घरेलू एलपीजी पर कैश आधारित डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर स्कीम (डीबीटीएस) की शुरुआत एक जनवरी से होगी।
हालांकि तेल कंपनियों को इस बारे में अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं लेकिन, तीनों कंपनियों ने डीबीटीएस को एक जनवरी से लागू करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
तीसरे चरण के तहत देश के 105 और शहरों में यह योजना लागू होनी है। इसमें प्रदेश के लखनऊ, कानपुर शहर व इटावा शामिल हैं।
इसके लिए केंद्र सरकार ने आधार कार्ड अनिवार्य शर्त लगा रखी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे ऐच्छिक करार दिया था।
इंडियन ऑयल व भारत पेट्रोलियम कंपनी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने डीबीटीएस को एक जनवरी से शहर में लागू किए जाने के संकेत दिए हैं।
योजना के लागू होने से शहर के करीब साढ़े पांच लाख एलपीजी उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। उनके साल भर के अधिकृत सस्ती दर के नौ घरेलू सिलेंडरों की सब्सिडी राशि सीधे उनके आधार कार्ड लिंक बैंक खाते में बुकिंग के बाद जमा कराई जाएगी।
भारत पेट्रोलियम से जुड़े क्षेत्रीय प्रबंधक आंशू भारती ने बताया कि घरेलू एलपीजी वितरण में प्रस्तावित कैश बेस सब्सिडी योजना को लागू करने की तैयारियों में तेल कंपनियां जुटी हैं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल जिन उपभोक्ताओं ने अपना आधार कार्ड आधारित बैंक खाता नंबर संबंधित गैस एजेंसियों पर पंजीकृत करा लिया है उन्हें सूचीबद्ध किया जा रहा है।
आईओसी के जीएम यूपी सिंह का भी कहना है कि तेल कंपनियां डीबीटीएस को लागू किए जाने के लिए तैयार हैं।
आधार कार्ड बनवाने के लिए तीनों कंपनियां केंद्र व राज्य सरकार के साथ संयुक्त अभियान चलाएंगी।
31 मार्च तक ग्रेस पीरियड की मोहलत
एक जनवरी से प्रस्तावित कैश रिफंड बेस योजना के तहत फिलहाल उपभोक्ताओं को तीन माह की मोहलत दी जाएगी। इस दौरान उन्हें आधार कार्ड बनवाना होगा।
इसके तहत 31 मार्च 2014 तक बिना आधार कार्डधारी उपभोक्ताओं को सब्सिडी युक्त सिलेंडर मिलेगा लेकिन एक अप्रैल से सिर्फ आधार कार्ड वालों को ही सिलेंडर मिलेगा।