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डिप्थीरिया का कहर: आजमगढ़-उन्नाव में हुई नौ बच्चों की मौत, हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग, जानिए क्या है बीमारी

Sat, 17 Aug 2024 09:27 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Diphtheria havoc in UP: यूपी में डिप्थीरिया से नौ बच्चों की मौत के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आई है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस मामले जांच करने के लिए कहा है। 
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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 आजमगढ़ में छह और उन्नाव में तीन बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद खुल गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर बच्चों का टीकाकरण कराया। स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित जिलों से रिपोर्ट तलब की है। निर्देश दिया है कि जिन इलाके में बच्चों की मौत हुई है, वहां निरंतर निगरानी की जाए। इन बच्चों की मौत ने टीकाकरण व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। डब्ल्यूएचओ की टीम भी पूरे मामले का मौका मुआयना कर रही है।

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से डिप्थीरिया सहित अन्य बीमारियों से बचाव के लिए 95 फीसदी टीकाकरण का दावा है। विभाग की ओर से 49 जिले के 92 ब्लॉक में डिप्थीरिया रोकने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान भी चलाया गया है, लेकिन आजमगढ़ और उन्नाव में बच्चों की मौत के बाद हकीकत सामने आई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने टीकाकरण नहीं कराया था। बच्चों की मौत के फैली दहशत के बीच संबंधित गांवों में टीकाकरण कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि दम तोड़ने वाले और बीमार बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण हैं। 

यही वजह है कि उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। बच्चों की मौत की खबर प्रदेश मुख्यालय पहुंची तो यहां से भी दोनों जिलों की स्थिति के बारे में पल- पल की खबर ली जा रही है। चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण विभाग के मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि आजमगढ़ के मामले में एक बच्चे की मौत की पुष्टि डिप्थीरिया से हुई है। अन्य अभी संदिग्ध हैं। छह के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्नाव में भी डिप्थीरिया से एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है। जबकि अन्य की मौत के कारण अभी स्पष्ट नहीं है। 14 के सैंपल भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर है।
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आजमगढ़ः छह बच्चों की मौत के बाद कराया गया टीकाकरण
आजमगढ़ के निजामाबाद के सीधा सुल्तानपुर में छह बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो पता चला कि इन बच्चों का टीकाकरण ही नहीं हुआ था। आनन- फानन में सभी का टीकाकरण कराया गया। बीमार 10 बच्चों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। सीएमओ डा. अशोक कुमार ने बताया कि लक्षण डिप्थीरिया के हैं। इन बच्चों ने टीकाकरण नहीं कराया था। टीम मौके पर है। अब स्थिति नियंत्रण में हैं।

उन्नावः तीन की मौत, कई बीमार
उन्नाव के सतगुरखेड़ा में शिवन्या (6), बजेहरा की शगुन (12) और दरियारखेड़ा की आरती (7) की मौत हो गई। सीएमओ डा. सत्यप्रकाश ने बताया कि इन सभी बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण थे। कई बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। एक बच्चा लखनऊ के मोहनलालगंज का था। शनिवार को 121 बच्चों को टीका लगवाया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में मौजूद है। 10 बच्चों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। सीएमओ ने बताया कि प्रदेश के 86 ब्लाकों में डिप्थीरिया के केस पाए गए हैं। इनमें उन्नाव के असोहा में सात, हसनगंज में तीन और नवाबगंज में दो बच्चों में डिप्थीरिया की पुष्टि हुई है।

क्या कहते हैं उप मुख्यमंत्री
बच्चों की मौत दुखद है। पीड़ित परिवार के साथ पूरी सरकार खड़ी है। दोनों जिलों के स्वास्थ्य अधिकारी मौके पर हैं। बीमार बच्चों का उपचार कराया जा रहा है। सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। डिप्थीरिया की बीमारी है या कोई और बात, इसकी भी जांच चल रही है। बीमारी फैलने के कारणों की जानकारी जुटाकर इसे रोकने की रणनीति है। जरूरत पड़ी तो संबंधित गांवों में स्वास्थ्य अधिकारी कैंप करेंगे। इलाके के सभी अस्पतालों में दवाओं व अन्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली गई है।- ब्रजेश पाठक, उप मुख्यमंत्री

क्या है डिप्थीरिया
पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डा. बद्री विशाल ने बताया कि डिप्थीरिया एक जीवाणु संक्रमण है। यह कोरिनेबैक्टीरियम प्रजातियों के कारण होती है। यह नाक और गले को प्रभावित करता है। यह त्वचा में किसी दरार के माध्यम से भी प्रवेश कर सकता है। यह खांसने या छींकने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद, लक्षण विकसित होने में आमतौर पर दो से चार दिन लगते हैं। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, गले और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाता है, जिसके परिणामस्वरूप दम घुटने से मृत्यु हो जाती है। इससे बचाव के लिए डीटीएपी और टीडीएपी का टीका लगता है। हर 10 साल में टीके की बूस्टर खुराक की आवश्यकता हो सकती है। इसका लक्षण होने पर बुखार और ठंड लगना, गले में खराश, आवाज बैठना, भोजन-पानी निगलने में दर्द, लार टपकना, त्वचा का रंग नीला होना, सांस लेने में दिक्कत, सांस तेज चलना, सांस लेने में तेज आवाज होना आदि है।

टीकाकरण व्यवस्था पर सवाल
बाल रोग विशेषज्ञ डा. आशुतोष कुमार वर्मा ने क हा कि जिस तरह से डिप्थीरिया के केस सामने आए हैं, यह टीकाकरण व्यवस्था की पोल खोल रहा है। जहां भी ग्रामीण टीकाकरण में आनाकानी करते हैं, विभाग उसकी रिपोर्ट तैयार करता है और विशेष अभियान में हर हाल में टीकाकरण कराया जाता है। क्योंकि एक भी बच्चे के छूटने का मतलब है, पूरा चक्र टूटना।

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