लखनऊ। आलमनगर में रेलवे वेयरहाउस की जमीन पर गहरी पेय जल पाइप लाइन बिछाने के दौरान सोमवार को खोदाई में धंसी मिट्टी में तीन मजदूर दब गए थे जिसमें एक की मौत हो गई थी। यह काम कौन करा रहा था और किसकी लापरवाही से यह हादसा हुआ, इस पर रेलवे चुप्पी साधे रहा और जिम्मेदारी लेने से ही पल्ला झाड़ता रहा। बुधवार को अमर उजाला ने मामले की पड़ताल की तो स्पष्ट हुआ कि आलमनगर स्टेशन पर पेय जल आपूर्ति की समस्या दूर करने के लिए यह काम कराया जा रहा है।
आलमनगर रेलवे स्टेशन के पास ही वेयरहाउस की खाली जमीन पर नया ट्यूबवेल लगाया गया है। यहीं से एक गहरी पाइप लाइन स्टेशन के पास बनी टंकी को भरने के लिए ले जाई जा रही है। पाइप लाइन को रेलवे ट्रैक के उस पार ले जाना है। इसके लिए सड़क के नीचे से पाइप को पास कराने के लिए सुंरगनुमा खोदाई की जा रही थी। इसी काम के दौरान हादसा हुआ। पड़ताल के दौरान स्थानीय लोगों ने यह बताया कि यह काम आलमनगर स्टेशन पर पेय जल आपूर्ति के लिए कराया जा रहा है। जिस जमीन पर काम हो रहा है वह रेलवे की है।
15 फीट नीचे से गुजरना था पाइप
पेय जल के पाइप को सड़क से करीब 15 फीट नीचे से गुजरना था। ऐसे में खोदाई के दौरान सुरक्षा इंतजाम के तहत शटरिंग किया जाना जरूरी था ताकि मिट्टी न धंसे। मौके पर काम कराने वालों ने सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए थे। यही वजह थी कि खोदाई के दौरान मिट्टी धंस गई और तीन मजदूर दब गए।
रेलवे पहले भी दबा चुका है हादसे
जानकारों ने बताया कि रेलवे प्रशासन की लापरवाही से कई मजदूरों की जान बीते वर्षों में जा चुकी है। चारबाग स्टेशन अपग्रेडेशन के दौरान सेकंड इंट्री पर काम के दौरान एक मजदूर की मौत हो गई थी। आरोप है कि रेलवे अफसरों ने इस मामले को दबा दिया था। इसी तरह ऐशबाग यार्ड में मरम्मत कार्य के दौरान एक मजदूर की खुले तार से करंट लगने से हो गई थी। यह मामला भी दबा दिया गया। अब यही काम सोमवार को हुए हादसे में किया जा रहा है।
जितने जिम्मेदार, उतने बयान
इस मामले में मंगलवार को उत्तर रेलवे के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कुलदीप तिवारी ने कहा था कि वह इस मामले की जांच कराएंगे कि हादसा कैसे हुआ। बुधवार को जब उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस मामले में उनकी सीनियर डीएमई से बात हुई। वह काम कराने से इन्कार कर रहे हैं। जब सीनियर डीएमई से अमर उजाला ने बात की तो पहले उन्होंने काम कराने से इन्कार किया। फिर स्वीकार किया कि काम हो रहा है, मगर राज्य सरकार की एजेंसी कर रही है जबकि एजेंसी के जिम्मेदारों ने यह बयान दिया है कि अभी काम नहीं चल रहा ऐसे में हादसा कैसे हुए, काम कौन कर रहा था, इसकी जानकारी नहीं है।
कार्यस्थल पर होने चाहिए थे सुरक्षा के ये इंतजाम
0 रोड के नीचे से पाइप गुजारने के लिए मैनुअल के बजाय मशीन से खुदाई करानी चाहिए।
0 जिस सड़क के नीचे से पाइप गुजारना है पहले उसके दोनों ओर गड्ढे बनाना चाहिए।
0 सुरक्षा को लेकर दोनों गड्ढों की ओर कम से दो से तीन कर्मचारी अलर्ट रहने चाहिए।
0 काम करने वाले कर्मचारी के पास ऑक्सीजन मास्क और सेफ्टी हेलमेट होना चाहिए।
0 जो गड्ढे बनाए जाएं उनके अंदर शटरिंग की जाए जिससे मिट्टी न धंसे।
0 मशीन से सड़क के आरपार ट्रेंचलेस खोदाई का सिस्टम अपनाया जाए।
0 ट्रेंचलेस में मशीन से खोदाई होती है जिसमें मिट्टी भी निकलती रहती है।
0 कार्य के दौरान को बाहरी व्यक्ति आसपास न आए इसके लिए बैरिकेडिंग होनी चाहिए।
(जैसा कि विशेषज्ञ के तौर पर जल निगम के मुख्य अभियंता शमीम अख्तर ने सुझाया।)
आलमनगर का वह स्थान जहां हो रही थी पाइन लाइन के लिए खोदाई। - फोटो : अमर उजाला
आलमनगर का वह स्थान जहां हो रही थी पाइन लाइन के लिए खोदाई। - फोटो : अमर उजाला
आलमनगर का वह स्थान जहां हो रही थी पाइन लाइन के लिए खोदाई। - फोटो : अमर उजाला
आलमनगर का वह स्थान जहां हो रही थी पाइन लाइन के लिए खोदाई। - फोटो : अमर उजाला