लखनऊ। डीजल की कालाबाजारी को रोकने की बात कहते हुए सरकार ने पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद पर 90 दिनों के लिए कुछ नए नियम बनाए हैं। नए नियमों के मुताबिक किसी भी वाहन अथवा व्यक्ति को पेट्रोल पंप से प्रतिदिन 200 लीटर से ज्यादा डीजल देने पर रोक लगाई गई है। इससे डीजल के लिए पेट्रोल पंपों पर निर्भर मिठाई और खान-पान से जुड़े कारोबारियों के लिए मुश्किल पैदा हो गई है। कारोबारियों के मुताबिक पेट्रोल पंप पर कैन में डीजल नहीं मिल रहा है। दिन भर स्टाफ डीजल के लिए पेट्रोल पंपों पर चक्कर लगा रहे हैं। सरकार की ओर से 200 लीटर डीजल खरीदने की मंजूरी है लेकिन 10-20 लीटर डीजल भी नहीं मिल रहा है। डीजल का संकट होने से डीजल भट्ठियां जलाने में मुश्किल हो रही है। पेट्रोल पंप से यह कहकर लौटाया जा रहा है कि जहां व्यावसायिक उपयोग के लिए डीजल मिल रहा है, वहां से ले लें। ऐसे में व्यापारियों की मांग है कि कंपनियां हम लोगों के लिए एक तय जगह बता दें, जहां से डीजल मिल सके।
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ज्यादा कंट्रोल से कालाबाजारी का डर
पेट्रोल पंप पर डीजल नहीं मिल रहा है। ऐसे में कंपनियां यह तय करें कि व्यावसायिक उपयोग के लिए डीजल कहां से मिलेगा, जिससे हम कारोबारियों को आसानी हो। ज्यादा कंट्रोल से कालाबाजारी बढ़ने का भी डर है।
अविनाश त्रिपाठी
प्रदेश प्रभारी, स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट प्रकोष्ठ, उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल
दो दो दिन से भटक रहे
इंदिरानगर के रेस्टोरेंट कारोबारी दिनेश वर्मा बताते हैं कि इस नियम से तो स्टाफ का एक व्यक्ति सिर्फ डीजल के लिए ही दौड़ता रहेगा। दो दिन से यही हालात हैं। 90 दिन के लिए यह व्यवस्था की गई है लेकिन हम लोगों के लिए कोई रास्ता निकाला जाए।
सिर्फ पेसो से स्वीकृत कंटेनरों में डीजल देने की मंजूरी-
लखनऊ पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव आलोक त्रिवेदी बताते हैं कि सिर्फ वाहनों में ही अधिकतम 200 लीटर डीजल देने के लिए अधिकृत किया गया है। अन्य किसी भी व्यवस्था के तहत व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए डीजल देेन की मनाही है। सिर्फ पेसो की ओर से स्वीकृत कंटेनरों में ही डीजल मिल सकता है। इसलिए कैन में डीजल नहीं दिया जा रहा है। अगर किसी को डीजल की आवश्यकता है तो उसे पेट्रोल पंप से डीजल के लिए डीएसओ से लिखवाना होगा।