लखनऊ। केजीएमयू के कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर (धात्री अमृत कलश) नवजातों के लिए संजीवनी बन रहा है। केंद्र में अब तक समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार 1,716 नवजातों को सुरक्षित डोनर ह्यूमन मिल्क दिया जा चुका है।
सेंटर की नोडल एवं वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. शालिनी त्रिपाठी बताती हैं कि हमारा उद्देश्य सिर्फ डोनर मिल्क उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि हर मां को उसके बच्चे को स्तनपान कराने के लिए सक्षम बनाना भी है। हर महीने लगभग 15-20 लीटर डोनर ह्यूमन मिल्क एकत्र किया जाता है। स्वास्थ्य जांच, संक्रमण की स्क्रीनिंग, पाश्चुरीकरण और गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही यह दूध जरूरतमंद नवजातों को दिया जाता है। विश्व स्तनपान सप्ताह एक अगस्त से शुरू हो रहा है। ऐसे में प्रसूताओं को जागरूक किया जाएगा।
डोनर ह्यूमन मिल्क समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए संजीवनी
प्रो. शालिनी बताती हैं कि समय से पहले या कम वजन वाले बच्चों की आंतें बेहद नाजुक होती हैं। मां का दूध या डोनर ह्यूमन मिल्क इन बच्चों में आंतों की बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है। पाउडर वाला दूध इन नाजुक बच्चों की आंतों को पचाने में भारी पड़ता है।
दिमाग और शारीरिक विकास के लिए जरूरी
दूध में मौजूद डोकोसाहेक्सेनोइक एराकिडोनिक जैसे फैटी एसिड बच्चे के मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और आंखों की रोशनी के विकास के लिए आवश्यक हैं। दूध में मौजूद प्रोटीन और शुगर पेट की बीमारियों से बचाते हैं। मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, अस्थमा और एलर्जी जैसी बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।