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Lucknow News: धत्त तेरे की ने गुदगुदाया, सामाजिक सोच पर भी उठाए सवाल

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गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।
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लखनऊ। हास्य-व्यंग्य से भरपूर नाटक धत्त तेरे की ने रविवार को गांधी भवन प्रेक्षागृह में दर्शकों को खूब गुदगुदाया। साथ ही मानसिक रोगियों के प्रति समाज के उपेक्षापूर्ण रवैये पर सवाल भी उठाए। रविवार को तीन दिवसीय 36वें वार्षिक समारोह का समापन नाटक और नृत्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ। अखिल भारतीय सांस्कृतिक संस्थान-लखनऊ और मुंबई के एबीएसएस थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने प्रभावी अभिनय किया।
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वरिष्ठ रंगकर्मी राजेंद्र तिवारी के लेखन-निर्देशन में नाटक की कहानी थाने से शुरू होती है। हवालात में जन्मे बच्चे की मां की मौत के बाद उसका नाम पैदाइश रखा जाता है। बदलते थानेदार उसके लिए पिता की भूमिका निभाते हैं। कहानी रिश्तों, अपनत्व और स्वीकार्यता का संदेश देती है।

क्रिएटिव डायरेक्टर निष्ठा तिवारी के मार्गदर्शन में रतिकांत दास, ललित पांडेय, निजाम हुसैन, राजपति साहू, शिव शेट्टी, केके अवस्थी, संजय यादव, दिलकश रिजवी, आशी अग्रवाल, नेहा गुप्ता, मोनिका भारती समेत कलाकारों ने प्रभावी अभिनय किया। सचिव लाल बहादुर राय ने आभार जताया।
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बच्चों ने नृत्य से सजाई महफिल

इसके बाद करीब 75 विद्यालयों के एक हजार बच्चों ने नृत्य प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय के प्रो. मोहित कपूर और डॉली तिवारी ने प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। समारोह में जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र नाथ पांडेय समेत अन्य मौजूद रहे।

गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।

गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।

गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।

गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।

गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।

गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।

गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।

गांधी भवन में नृत्य प्रस्तुतियां देते बच्चे।

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