फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: धरती आबा की सुंदर प्रस्तुति से दर्शक मंत्रमुग्ध

Tue, 18 Nov 2025 02:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
विज्ञापन
जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर
विज्ञापन
लखनऊ। जनजाति भागीदारी उत्सव–2025 के तहत सांस्कृतिक सत्र में पांचवें दिन जनजाति के कलाकारों ने बिरसा मुंडा पर आधारित नाटक धरती आबा की सुंदर प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया।
विज्ञापन


सोमवार को सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत बूटी बाई (चित्रकूट) व उनके दल की ओर से चांगेलिया नृत्य के साथ किया गया। जिसने मंच पर उत्साह और लोकधुनों का ऐसा संगम रचा कि सभागार तालियों से गूंज उठा। राजकुमारी (बहराइच) ने पारंपरिक हूरदूंगवा नृत्य प्रस्तुत कर तराई क्षेत्र की सांस्कृतिक छटा का जीवंत अनुभव कराया।
अबू सालेह (पश्चिम बंगाल) व उनके दल ने रायबेंसे नृत्य की वीरता और तालबद्ध युद्धक शैली से दर्शकों का दिल जीत लिया। विनोद कुमार (वाराणसी), लाल सिंह मकाम (मध्य प्रदेश), उत्तराखंड से आए प्रेम हिंदुआन ने अपने गीत से लोक-सुरों की मोहक गूंज भर दी।

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

जनजाति कलाकारों ने परंपरागत और विविध जनजातीय नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें