अयोध्या में धर्मसभा के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे विश्व हिंदू परिषद व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने शिवसैनिकों की तर्ज पर 'पहले मंदिर फिर सरकार, हर हिंदू की यही पुकार' के नारे लगाए।
आपको बता दें कि शनिवार को शिवसेना की ओर से आयोजित की गई संत आशीर्वाद सभा में शिवसैनिक यही नारे लगा रहे थे। वहीं, शिवसेना अध्यक्ष उद्घव ठाकरे ने सभा में अपने संबोधन के दौरान केंद्र सरकार पर निशाना साधा था और कहा था कि मैं चार साल से सो रह कुंभकरण को जगाने आया हूं। अब नारा नहीं, मंदिर निर्माण की तारीख बताएं। उन्होंने कहा था कि अगर मोदी सरकार मंदिर पर संसद में अध्यादेश लाती है तो शिवसेना उसका समर्थन करेगी।
अयोध्या पहुंचने पर मुस्लिम समुदाय ने किया रामभक्तों का स्वागत
अयोध्या में रविवार को सांप्रदायिक सौहार्द्र के भी नजारे दिखे। जब रामभक्त अयोध्या पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद मुस्लिम समुदाय ने उनका स्वागत किया और धर्मसभा के मार्ग पर उनके रास्ते में फूल बरसाये।
इसके अलावा किन्नर समाज के लोगों ने भी अयोध्या में राममंदिर बनाये जाने का आह्वान किया और कहा कि अब इस पर और इंतजार नहीं कर सकते।
रामलला का दर्शन कर पत्नी संग वापस लौटते उद्घव ठाकरे
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अयोध्या में रविवार के अपने परिवार सहित रामलला का दर्शन करने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार को राममंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाना चाहिए। शिवसेना उसका समर्थन करेगी। हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा अगर मंदिर नहीं बना तो सरकार नहीं बनेगी। हिंदू अब ताकतवर हो गया है और अब मार नहीं खाएगा।
ठाकरे ने कहा कि रामलला के दर्शन कर बाहर आने पर ऐसा लगा कि मैं जेल से निकल रहा हूं। मैं कल से अयोध्या में हूं। यहां अच्छा लग रहा है। राममंदिर का नाम लेकर अब वोट की राजनीति नहीं होनी चाहिए। पिछले चार सालों में सरकार ने कुछ नहीं किया। अगर मामला अदालत के पास ही जाना है तो चुनाव प्रचार में राममंदिर का इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए। जनता से कह देना चाहिए कि राममंदिर भी हमारे लिए एक चुनावी जुमला था।
उद्घव ठाकरे ने कहा कि संसद का एक सत्र बचा हुआ है। इसमें राममंदिर के लिए अध्यादेश लाना चाहिए। शिवसेना अध्यादेश का समर्थन करेगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि, योगी जी ने कहा था कि वहां मंदिर था, मंदिर है और मंदिर ही रहेगा। ठाकरे बोले, दुख तो इस बात का है कि मंदिर दिख नहीं रहा है। जल्द से जल्द मंदिर निर्माण होना चाहिए।
निर्दलीय विधायक राजा भैया
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पूर्व मंत्री व कुंडा के निर्दलीय विधायक राजा भैया ने कहा कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण पर रोज-रोज नौटंकी बंद होनी चाहिए। इस मुद्दे पर भाजपा को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। बंद कमरे में नेता कुछ बोलते हैं और बाहर निकलने के बाद जनता के बीच कुछ और। मंदिर के मुद्दे पर भाजपा को अपनी स्पष्ट राय देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में लोगों की आस्था को देखते हुए राममंदिर का निर्माण होना चाहिए, लेकिन इसके लिए सबकी सहमति हो। यदि ऐसा नहीं हो पाता तो संवैधानिक तरीके से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लोगों को इंतजार करना चाहिए। जब भी चुनाव करीब आता है राम मंदिर का मुद्दा गरमाया जाता है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि अपनी कमियों व विफलताओं से जनता का ध्यान बंटाने के लिए भाजपा ने पर्दे के पीछे से राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान शुरू कराया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसका निपटारा कोर्ट से ही होना चाहिए।
मायावती ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत में कहा कि छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश में भाजपा सत्ता में आने वाली नहीं है। लोकसभा चुनाव में भी वह सत्ता में आने वाली नहीं है। इसका एहसास भाजपा, आरएसएस व उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना को भी है। इसीलिए ये सोची-समझी रणनीति के तहत राम मंदिर निर्माण का मामला उठा रहे हैं। साधु-संतों, आरएसएस व शिवसेना को आगे कर अभियान चलाया जा रहा है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद की हो रही धर्मसभा के बीच लखनऊ में भी सियासी पारा चढ़ने लगा है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल रामनाईक से राममंदिर व प्रदेश की कानून-व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर चर्चा की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। वहीं, उनके समर्थकों ने राजभवन का घेराव किया और प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
शिवपाल ने कल भी धर्मसभा को लेकर बयान दिया था कि अयोध्या में धारा 144 लागू होने के बाद भी भीड़ को एकत्र होने दिया जा रहा है। किसी भी कीमत पर विवादित भूमि पर सवोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना नहीं होनी चाहिए। अगर राज्य व जिला प्रशासन स्थिति को नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए।
बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी
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बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने अयोध्या में धर्मसभा के दौरान रही सुरक्षा व्यवस्था पर संतुष्टि जारी करते हुए कहा कि अगर ऐसी ही सुरक्षा 1992 में रही होती तो ढांचा विध्वंस न होता। इकबाल प्रशासन से पूरी तरह संतुष्ट नजर आए।
गौरतलब है कि धर्मसभा के आयोजन से पहले इकबाल ने अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जताई थी जिसे प्रशासन ने पूरी गंभीरता से लेते हुए उनके घर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी।
इकबाल ने कहा कि राम मंदिर मुद्दे का शांतिपूर्वक निपटारा होना चाहिए। आयोजन के लिए नगर को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
हाईअलर्ट जारी करते हुए एक-एक एडीजी-डीआईजी, तीन एसपी, 10 एएसपी, 21 डीएसपी, 42 कंपनी पीएसी, 5 कंपनी आरएएफ समेत एटीएस कमांडो तैनात किए गए थे।