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कभी 50 हजार का इनामी था धनंजय सिंह

Wed, 06 Nov 2013 11:54 AM IST
विष्णु मोहन/लखनऊ
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घर में किसी की संदिग्ध हालात में मौत होने का यह कोई पहला मामला नहीं है, जिसे लेकर धनंजय सिंह का नाम चर्चा में आया हो।
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पहले भी कुछ ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।

इससे पहले 2007 में धनंजय सिंह की पत्नी मीनाक्षी की उनके गोमतीनगर स्थित आवास पर संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।

हादसे के फौरन बाद धनंजय पर इसके लिए आरोप लगे थे, लेकिन किसी ने उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत नहीं की थी।

पटना से लखनऊ पहुंची उनकी पहली पत्नी के परिवार के सदस्यों ने भी इसको लेकर चुप्पी साध ली थी। इस हादसे से धनंजय जल्दी ही उबर गए।

इसी का नतीजा था कि कुछ समय से बाद धनंजय सिंह ने डॉक्टर जागृति सिंह से मैहर स्थित शारदा देवी के मंदिर में विवाह कर लिया था।

विवाह के बाद धनंजय का नाम एक बार फिर तब चर्चा में आया जब उनके जौनपुर के पैतृक गांव बनसफा में उनके एक घरेलू नौकर की संदिग्ध हालात में मौत होने की सूचना सामने आई।

लेकिन बाहुबली पर तब भी किसी तरह का आरोप लगाने के लिए कोई सामने नहीं आया। न ही किसी ने पुलिस से कोई औपचारिक शिकायत की।

पढ़ें, नौकरानी मर्डर: सांसद धनंजय सिंह गिरफ्तार

सूत्रों की मानें तो पुलिस को भी इस तरह की सूचना मिली थी, लेकिन किसी तरह की जांच नहीं की गई। पूछने पर पुलिस भी बाद में ऐसी किसी तरह की जानकारी होने से मना करती रही।
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चर्चा इस बात की भी है कि बाहुबली राजनेता का एक चालक भी संदिग्ध हालात में लापता हो चुका है। लेकिन इस मामले में भी न किसी ने कोई शिकायत की न ही कोई पुष्टि हुई।

सांसद पर था कभी 50 हजार का इनाम
धनंजय सिंह का विवादों से पुराना नाता है। छात्र जीवन से ही विवादों में रहे धनंजय सिंह जरायम जगत का दामन थामने पर भी चर्चा में रहे।

कभी किसी नामचीन की हत्या के पीछे उनका नाम सामने आया तो कभी सूबे की राजनीति में उनके दखल पर।

धनंजय सिंह ने जब लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंच कर छात्र राजनीति में अपना दखल किया तो पूर्वांचल का सारा छात्र उनके साथ हो लिया।

तब धनंजय अपने अभिन्न मित्र अभय सिंह के साथ देखे जाते थे। अब अभय सिंह (फैजाबाद से विधायक) से उनका छत्तीस का आंकड़ा है।

छात्र राजनीति के दौरान ही विभिन्न विरोधियों से रंजिशों का दौर और जरायम जगत का जोड़ धनंजय को उस मुकाम पर पहुंचा गया जब उनकी फरारी पर सरकार ने 50 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया था।

यह वही समय था जब भदोही में पुलिस के साथ हुई एक कथित मुठभेड़ में धनंजय समेत दो लोगों को मार दिया गया था। बाद में सामने आया था कि पुलिस ने जिन्हें धनंजय समझ कर मारा वह कोई और थे।

बाद में कभी बसपा तो कभी किसी अन्य दल से उनका नाता जुड़ता रहा। बसपा से उनका साथ इस बार लंबा खिंचा है।

लेकिन जब वर्ष 2009 में बसपा के टिकट से वह चुनाव जीते थे, उसके कुछ दिनों बाद ही उनके बगावती तेवरों पर बसपा से उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

हालांकि, बाद में पार्टी ने उन्हें बगैर शर्त वापस ले लिया, लेकिन इस बीच सरकार के इशारे पर जौनपुर के एक डबल मर्डर केस की दोबारा विवेचना शुरू कर दी गई थी। इस मामले में धनंजय को जेल भी जाना पड़ा था।

डीजी मेडिकल हेल्थ बच्ची लाल की हत्या के मामले में चर्चा में आने के साथ ही धनंजय का नाम एनआरएचएम घोटाले में जेल में संदिग्ध हालात में हुई डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान की मौत से भी जुड़ा था।
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गौरतलब है कि सीबीआई ने इस सिलसिले में धनंजय से पूछताछ भी की थी।

ज्यादातर नोएडा में ही रहती हैं जागृति
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली डॉ. जागृति सिंह के पिता उमा शंकर सिंह सरकारी सेवा में परियोजना निदेशक के पद पर कार्यरत रहे।

जागृति ज्यादातर समय नोएडा में रहती है। वहीं एक निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करती हैं। उनका जौनपुर जाना बहुत कम होता है। जागृति और धनंजय का एक बेटा भी है।

जो उनके दिल्ली आवास पर रहता है। पेशे से डेंटिस्ट डॉक्टर जागृति ने जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट से 2012 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय के तौर पर लड़ा था।

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