आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी व उसकी पत्नी
एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के मामले में प्रदेश सरकार के मंत्री से लेकर डीजीपी तक झूठ पर झूठ बोलते रहे। पहले डीजीपी ओपी सिंह ने दोपहर करीब डेढ़ बजे गाजियाबाद में हत्या के आरोपी सिपाहियों की गिरफ्तारी और उन्हें जेल भेजने का बयान दिया।
इसके बाद एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पौने एक बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों को जेल भेजने की बात कही। इसके बाद विवेक के परिवारीजनों को मनाने के लिए उनके घर पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने शाम साढ़े चार बजे कहा कि आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
सच्चाई तो यह थी कि मुख्य आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी न सिर्फ आजाद घूम रहा था बल्कि शाम करीब पांच बजे पेशबंदी में एफआईआर कराने गोमतीनगर थाना पहुंच गया। झूठ का खुलासा हुआ तो आनन-फानन सिपाही को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
विवेक के ससुर रमेश चंद्र शुक्ला और अन्य रिश्तेदारों को बताया गया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है तो उन्होंने विरोध किया।
बोले, मेरा दामाद मारा गया और एफआईआर किसी और की तरफ से दर्ज कर ली गई। इस पर पुलिस अधिकारी सकपका गए। उन्होंने परिवार की तरफ से तहरीर मिलने पर उसे विवेचना में शामिल करने की बात कहकर समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने कहा कि आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी बर्खास्तगी की कार्रवाई भी की जा रही है।