बीते चार सालों में अखिलेश सरकार के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर में गिनाने के लिए कामों की लंबी फेहरिस्त है। इसमें आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, लखनऊ-बलिया एक्सप्रेस-वे और लखनऊ मेट्रो जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। पर, दूसरी ओर जिलों को फोरलेन से जोडऩे का काम अभी तक अधूरा पड़ा है।
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302 किमी लंबे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे को सरकार डवलपमेंट के चेहरे के तौर पर पेश करती है। चुनाव के एलान से पहले सरकार इस पर गाडिय़ों को दौड़ाने की तैयारी में है। पांचवें साल में सरकार ने लखनऊ-बलिया पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का भी एलान किया।
पर, हकीकत यह कि हर साल बड़े-बड़े निवेशक सम्मेलन के बावजूद सरकार लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट के लिए एक भी निवेशक का भरोसा नहीं जुटा पाई। अब दूसरे एक्सप्रेस वे को भी बनाने का बोझ सरकारी खजाने पर डालने का फैसला किया गया है।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर में लखनऊ मेट्रो को दूसरा अहम कदम माना जाना चाहिए। सरकार चुनाव से पहले इसका ट्रायल करवाकर 2017 के चुनावी एक्सप्रेस को रफ्तार दे सकती है। पर, मेट्रो ट्रेन और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का फायदा कितना मिलेगा, यह भी बड़ा सवाल है।
सिर्फ 12 जिलों में ही मिली सफलता
इस दौरान सदन में ठहाके भी खूब लगे।
- फोटो : amar ujala
सरकार ने हर जिले को फोरलेन से जोडऩे का एक अहम एलान किया था। इसका फायदा हर जिले तक होने वाला था। मगर, चार साल में सरकार 12 जिलों को ही फोरलेन से जोड़ पाई है। बाकी जिलों में अब भी हिचकोले खाते वाहन दौड़ रहे हैं।
सरकार ने दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को बड़े निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करने के रूप में प्रचारित किया था। पर, अभी तक इससे जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों व निवेश क्षेत्रों को डवलप करने की कागजी कार्यवाही ही पूरी की जा रही है।
आईटी सिटी में अभी तो सिर्फ कौशल विकास केंद्र
अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ आईटी सिटी में एचसीएल के ट्रेनिंग सेंटर को छोड़कर कोई भी प्रोजेक्ट चुनाव के पहले शुरू हो पाएगा, इस पर संशय बना हुआ है।
सरकार ने विधानसभा में माना कि इसका काम दो चरण में होना है। पहला चरण अक्तूबर 2020 तक पूरा होना है। दूसरा चरण 2020-25 का होगा। यहां एचसीएल का कौशल विकास केंद्र जरूर 1 नवंबर से शुरू करने की तैयारी है।
4 साल में 500 करोड़ से ज्यादा के सिर्फ दो प्रोजेक्ट हुए शुरू
अखिलेश
- फोटो : ANI
निवेश को रफ्तार देने के लिए अखिलेश सरकार ने कई नई नीतियां तो बनाईं, पर अमल शिद्दत से नहीं हो सका। विधानसभा में सरकार ने हाल में बताया कि बड़े निवेश वाले मेगा प्रोजेक्ट के तहत पिछले तीन सालों में 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश के लिए कुल 14 एमओयू हुए हैं।
इनमें दो उद्योग जालौन और बुलंदशहर में उत्पादन शुरू कर चुके हैं। पांच अभी लगने की प्रक्रिया में हैं। सात को जमीन ही नहीं मिल पाई है।
100 करोड़ से अधिक निवेश वाले प्रोजेक्ट की बात करें तो 20 पर ही बात आगे बढ़ी। इनमें भी नौ पर ही काम शुरू हो पाया।
नीतियों को अमलीजामा पहनाने के लिए इतने कम पैसे का बंदोबस्त हुआ कि बड़े निवेश की संभावना ही खत्म हो गई। पैसे की कमी के चलते खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में करीब 100 प्रोजेक्ट फाइलों में कैद हैं।
हर घर में बिजली के दावे, कर्ज तले पावर प्रोजेक्ट
बिजली
- फोटो : अमर उजाला
सरकार ने पावर सेक्टर में काफी काम करने का दावा किया, लेकिन सरकारी बॉन्ड से सांसे ले रहा पावर सेक्टर इन चार सालों में और बदहाल हो गया। इसका खुलासा हाल में सीएजी ने किया है। नतीजा 45,171.93 करोड़ रुपये का बॉन्ड जारी कर संजीवनी देने की नौबत आ गई।
अक्तूबर 2016 तक 16 से 22 घंटे बिजली देने का दावा कर रही सरकार चार साल बाद भी न तो आत्मनिर्भरता की स्थिति में है और न ही वितरण एवं ट्रांसमिशन का ऐसा नेटवर्क खड़ा कर पाई है जिससे गांव-गांव बिजली पहुंचा सके।
माया सरकार में एमओयू आधार पर जिन बिजली परियोजनाओं के लिए निजी क्षेत्र के साथ करार हुए थे, उनमें से 1980 मेगावाट की ललितपुर परियोजना को छोड़कर कोई भी परवान नहीं चढ़ सकी।
अखिलेश सरकार एमओयू करने वाले बाकी डवलपर्स को तीन बार डेढ़-डेढ़ साल का समय विस्तार भी दे चुकी है, लेकिन कोई परियोजना जमीन पर उतरती नही दिखाई दे रही है।
सौर ऊर्जा : 500 मेगावाट लक्ष्य, 90 का उत्पादन शुरू
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए 500 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं लगाने का लक्ष्य है। 90 मेगावाट की परियोजनाएं लगाई जा चुकी हैं। पावर कॉरपोरेशन इससे बिजली खरीद रहा है।
इनका अभी फायदे का इंतजार
- यमुना एक्सप्रेस-वे व ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में एक-एक इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना के फैसले के अभी जमीन पर उतरने का इंतजार।
- इलाहाबाद में सरस्वती हाईटेक सिटी का विकास होगा, विवि डवलपमेंट का काम चल रहा है।
- उन्नाव में ट्रांस गंगा परियोजना में नई ग्रीन फील्ड एकीकृत टाउनशिप विकसित होगी। प्रोजेक्ट का शिलान्यास तो हो चुका है, काम शुरू होने का इंतजार।
- चमड़ा उद्योग के विकास के लिए हरदोई के संडीला और रमईपुर मनकापुर में लेदर पार्क की स्थापना का एलान हुआ। पर बात इससे आगे नहीं बढ़ पा रही।
- सूबे में दुग्ध की डेयरियों की स्थापना की कवायद पिछले पांच साल से चल रही है। इस साल के अंत तक आजमगढ़ और लखनऊ की डेयरी शुरू हो सकती है।