महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ और महान शायर कैफी आजमी की धरती से मुलायम सिंह (नेताजी) का लगाव बहुत पुराना है।
वे आजमगढ़ को दूसरा घर बताते रहे हैं। जिले में यह कहने वाले बहुत लोग हैं कि नेताजी जब मुख्यमंत्री होते हैं या सूबे में समाजवादी सरकार बनती है, तब आजमगढ़ का खास ध्यान रखा जाता है।
पीजीआई से लेकर कमिश्नरी निर्माण तक अधिकतर विकास कार्य उन्हीं के कार्यकाल में हुए हैं। साल भर में नेताजी का आजमगढ़ का केवल एक दौरा हुआ लेकिन जब सठियांव आए तो विकास योजनाओं का पिटारा खोल गए।
इनमें कुछ पर काम चल रहा है और कुछ पाइप लाइन में हैं। डीएवी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल जगदीश सिंह कहते हैं कि शहर और जिले में चल रहे काम पूरे होंगे तो तस्वीर बदली हुई नजर आएगी।
शहर में चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण हो रहा है। सड़क, नाली, बिजलीघरों पर काम चल रहा है। पहले की तुलना में बिजली ज्यादा मिल रही है।
कहते हैं, मुलायम का एक साल का कार्यकाल बढ़िया रहा। हालांकि लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कराने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कटरा निवासी मो. अफजल इससे सहमत नहीं हैं।
कहते हैं, सांसद बनने के बाद नेताजी केवल एक बार आए, वो भी सभा को संबोधित करने। वह हमारे जनप्रतिनिधि हैं और हम उन्हें मांगपत्र तक नहीं दे सकते।
जहां तक घोषणाओं की बात है, पीजीआई को छोड़कर किसी पर अमल नहीं हुआ। चुनाव के दौरान धर्मेन्द्र यादव ने लावारिस लाशों के लिए एयरकंडीशंड मोर्चरी बनवाने का आश्वासन दिया था लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ।
जाफरपुर निवासी साहित्यकार पंकज गौतम विकास के नजरिये से नेताजी के कार्यकाल को अच्छा मानते हैं।
उम्मीद यही, पूरे जिले के किसानों की हालत सुधरेगी
मई 2014 में सांसद बनने के बाद नेताजी पहली बार 6 फरवरी 2015 को अपने संसदीय क्षेत्र के सठियांव में आए थे। उन्होंने पेराई सत्र 2006-07 से बंद पड़ी सहकारी क्षेत्र की चीनी मिल की जगह नए प्लांट का शिलान्यास किया।
नई चीनी मिल के लिए 230 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। 40 करोड़ रुपये रिलीज हो चुके हैं। चीनी मिल की नींव की खुदाई का काम चल रहा है, कुछ मशीनरी भी आ गई हैं।
चीनी मिल का काम शुरू होने से सठियांव कस्बे ही नहीं, आजमगढ़ के लोग भी उत्साहित हैं। सठियांव के संजय कुमार राय और पड़ोसी गांव सुराई के मोदी यादव कहते हैं, नेताजी ने बड़ा काम किया है।
पहले आजमगढ़ में बहुत गन्ना होता था। सठियांव मिल बंद होने से गन्ना क्षेत्रफल बहुत कम हो गया। हालांकि वे आशंकित हैं कि कुशल प्रबंधन के अभाव में कहीं मिल का निर्माण कार्य मार्च 2016 से आगे न खिसक जाए।
कादीपुर के सीताराम यादव, नासिरुद्दीनपुर के आजाद सिंह और काशीपुर के गोपाल राम कहते हैं कि चीनी मिल शुरू होने से पूरे जिले के किसानों की हालत सुधरेगी।
किसान कहते हैं कि नेताजी क्षेत्र में नहीं आते। उन तक यह बात भी पहुंचाना चाहते हैं कि इस इलाके में बारिश से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा अभी तक नहीं बंटा है।
2000 करोड़ के विकास कार्य प्रस्तावित
जिलाधिकारी सुहास एलवाई का कहना है कि आजमगढ़ में लगभग दो हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं या शुरू होने वाले हैं।
इनमें अधिकतर ऐसी योजनाएं शामिल हैं, जिनकी घोषणा या शुभारंभ मुलायम ने छह फरवरी 2015 को किया था। सठियांव चीनी मिल के लिए राशि स्वीकृत हुई है।
रेलवे स्टेशन से हरवंशपुर, सिविल लाइन चौक, मुकेरीगंज, हर्रा चौकी होते हुए बाईपास तक डिवाइडर सहित मार्ग का चौड़ीकरण एवं उच्चीकरण समेत शहर व देहात में दर्जनों सड़कों का निर्माण, पुनर्निर्माण या सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
लगभग 45 करोड़ रुपये से सिधारी क्रासिंग पर फ्लाईओवर बनाया जाएगा। 15 करोड़ रुपये लागत से आरटीओ कार्यालय का निर्माण होगा।
खड़ेलिया बंधे से गोलाघाट (गोरखपुर) के बीच आवागमन के लिए 332 करोड़ रुपये की लागत से घाघरा नदी पर पुल बनेगा। समुचित जल प्रबंधन के लिए शारदा सहायक नहर प्रणाली में सुधार पर 90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
17.50 करोड़ लागत से आजमगढ़ में 50 राजकीय नलकूप लगाए जाएंगे। 12 करोड़ की लागत से अतरौलिया-अतरैठ मार्ग और 11 करोड़ की लागत से देऊरपुर-महराजगंज मार्ग और 11.51 करोड़ की लागत से बूढ़नपुर-नरियांव मार्ग का चौड़ीकरण एवं उच्चीकरण होगा।
सीएचसी फूलपुर और सीएचसी लालगंज में 100-100 बेड के अस्पताल बनाए जाएंगे। मार्टीनगंज में तहसील, फायर स्टेशन बनेंगे। जिले में एक आधुनिक दुग्ध केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।
दम तोड़ रहा मुबारकपुर हैंडलूम कारोबार
मुबारकपुर कस्बा बुनकर बहुल है। अधिकांश घरों में हथकरघा या पावरलूम चलने की आवाज सुनाई देती है।
पुरा रानी मुहल्ले में घर में एक-एक हथकरघा और पावरलूम चलाने वाले मो. सिद्दीक और कमरूज्जमां भाई हैं। कहते हैं, सरकार से कोई सहूलियत नहीं मिली है।
हां, बिजली आपूर्ति पहले से बेहतर हुई है। पर उन्हें नहीं पता कि मुबारकपुर में बुनकरों के लिए विपणन केंद्र बन रहा है। साड़ी बनवाने वाले जमीरुल हसन कहते हैं, पिछले तीन महीने से कारोबार में बेहद मंदी है।
हम लोग बुनकरों से साड़ी बनवाते हैं और आगे व्यापारियों को देते हैं। मार्केट के रुझान का पता ही नहीं चलता। वह कहते हैं कि एक जमाने में मुबारकपुर के हैंडलूम की धमक थी लेकिन अब हैंडलूम का काम 25 प्रतिशत भी नहीं रहा।
पहले यहां एक लाख हथकरघा थे, अब दो-चार हजार भी नहीं बचे। ज्यादातर काम पावरलूम का है। बुनकर सहकारी समिति चलाने वाले इफ्तेखार अहमद अंसारी कहते हैं, बुनकरों के लिए 12 करोड़ की लागत से विपणन केंद्र बन रहा है।
बस डिपो के लिए जमीन अधिगृहीत कर ली गई है। बिजली व्यवस्था बेहतर हुई है और 132 केवी के एक बिजलीघर का काम शुरू हो गया है। वह चाहते हैं कि हैंडलूम बुनकरों को भी पावरलूम बुनकरों की तरह रियायती दर पर बिजली मिलनी चाहिए। नेताजी तक यह मांग पहुंचाई है, उम्मीद है, इस पर जल्द फैसला होगा।
तमौली में काम तो शुरू तस्वीर बदलने का इंतजार
बड़े-बड़े बोर्ड तमौली पहुंचते ही इशारा कर देते हैं कि यह गांव खास है। जिला मुख्यालय से महज आठ किमी दूर तमौली गांव की आबादी करीब 3600 है। इनमें थोड़े दलित, चंद घर बढ़ई, कुम्हार तो बाकी सभी यादव हैं।
इस गांव को मुलायम ने 21 नवंबर को गोद लिया था। इससे लोग उत्साहित तो हैं, पर कसक भी है। गांव वाले कहते हैं, छह फरवरी को नेताजी के सठियांव दौरे से पहले गांव में बिजली के खंभे लगने शुरू हुए, तार खिंचे, ट्रांसफार्मर भी लगे, लेकिन अभी तक काम अधूरा पड़ा है।
आजमगढ़-वाराणसी मुख्य मार्ग से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर पड़ने वाले तमौली गांव तक पक्की सड़क है। गांव के बाहर ही जूनियर हाईस्कूल और ग्राम सचिवालय हैं।
गांव के भीतर ज्यादातर जगह खड़ंजा बिछा हुआ है, पर लोगों की चाहत है कि सीसी रोड बने। बदलाव को लेकर सवाल होने पर ग्राम प्रधान रामलखन सिंह यादव बताते हैं कि 14-15 मई को जिला विकास अधिकारी ने गांव में कैम्प किया था।
उन्होंने ग्रामीणों से पूछा है कि वे प्राथमिकता के आधार पर क्या-क्या काम चाहते हैं? गांव के बारे में हर सूचना अफसरों ने जुटाईं। पर जहां तक काम का सवाल है तो अभी बिजली का काम हुआ है। हालांकि वह भी अधूरा पड़ा हुआ है। अफसरों ने बताया है कि जल्द ही दूसरे विभागों के विकास कार्य शुरू होंगे।
बढ़ीं उम्मीदें
गांव को गोद लिए जाने के बाद से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। तमौली के लोग चाहते हैं कि गांव में इंटर कॉलेज, एएनएम सेंटर और पशु चिकित्सालय बने।
1995 से होम्योपैथी कॉलेज की जमीन यूं ही पड़ी हुई है। उसका भी निर्माण होना चाहिए। हालांकि इस कॉलेज की प्रस्तावित भूमि में कुछ दिनों से हलचल हुई है।
बाउंड्री वॉल के भीतर ट्यूबवेल के बोरिंग का काम चल रहा है। लोग उम्मीद जताते हैं कि जल्द ही होम्योपैथी कॉलेज का निर्माण शुरू होगा।
गांव में पिछले दिनों पराग का मिल्क कलेक्शन सेंटर खोला गया है। 55 लोगों की दुग्ध सहकारी समिति बनी है। फिलहाल दुग्ध केंद्र को ग्राम सचिवालय के एक कक्ष से चलाया जा रहा है।
ग्राम प्रधान राम लखन बताते हैं कि पराग से 28-30 रुपये प्रति लीटर रेट मिल रहा है। आजमगढ़ में 35 रुपये तक लीटर तक दूध बिक जाता है। गांव के लोग चाहते हैं कि गांव में एक बड़ा डेयरी प्लांट लगे जिससे उन्हें भी अच्छी कीमत मिले।
तमौली में स्टेडियम बनाए जाने की घोषणा से युवा उत्साहित हैं। स्टेडियम के लिए ग्राम पंचायत की जमीन भी चिह्नित कर ली गई है।
डीएवी पीजी कॉलेज आजमगढ़ में एमए हिस्ट्री के छात्र तमौली निवासी विनय प्रताप सिंह यादव कहते हैं कि स्टेडियम बनने से आसपास के गांवों के युवाओं को भी लाभ मिलेगा। सभी खेलों की सुविधाएं मिलने से ग्रामीण प्रतिभाएं निखरेंगी।