चक्रवाती तूफान ने शनिवार को जगदीशपुर क्षेत्र में तबाही मचाई। तूफान से क्षेत्र के नियावां, जाफरगंज, करीडीह, बूबूपुर व मंगरौली समेत कई गांवों में धान, तिल, अरहर, गन्ना व चरी की फसल चौपट हो गई है। नियावां में दो घरों की कच्ची दीवार व टीन शेड गिर गए।
लखनऊ-वाराणसी रेल मार्ग पर निहालगढ़-सिंदुरवा स्टेशन के बीच करीडीह गांव के निकट की ओएचई (ओवर हेड इलेक्ट्रीफिकेशन) की लाइन पर पेड़ की डाल गिरने से डाउन ट्रैक करीब साढ़े पांच व अप ट्रैक एक घंटे तक बाधित रहा। इससे हावड़ा-अमृतसर अप एक्सप्रेस करीब पौने दो व एक मालगाड़ी करीब पांच घंटे लेट हुई। सिंदुरवा व निहालगढ़ से टावर वैगन भेजकर ओएचई लाइन को ठीक कराया गया।
शनिवार दोपहर बाद आए चक्रवाती तूफान से फसलों में भारी नुकसान हुआ है। विद्युत पोल गिरने से विद्युत आपूर्ति हो गई। कमरौली थाने के नियावां गांव में गुड्डी देवी व सोना देवी के कच्चे मकान की दीवार तूफान की चपेट में आने से ढह गई। गांव के कई अन्य लोगों के घरों पर रखे टीन शेड उड़ गए।
चक्रवर्ती तूफान के असर से नियावां, जाफरगंज, करीडीह, बूबूपुर व मंगरौली समेत कई गांवों में धान, तिल, अरहर, गन्ना व पशुओं के चारे के लिए बोई गई फसल का नुकसान हो गया। चक्रवाती तूफान से बिजली पोल, आम, महुआ समेत कई अन्य पेड़ की डालें गिर गईं। कुछ पेड़ धराशायी हो गए। विद्युत पोल गिर जाने से कई गांवों की आपूर्ति बाधित हो गई है। तेज हवा के साथ बारिश होने के साथ ही कुछ स्थानों पर ओले गिरे हैं।
तूफान से लखनऊ-वाराणसी रेल मार्ग के निहालगढ़-सिंदुरवा रेलवे स्टेशन के बीच करीडीह गांव के पास पेड़ की डाल ओएचई लाइन (ओवर हेड इलेक्ट्रीफिकेशन) पर गिर पड़ी। इसके चलते लखनऊ-वाराणसी रेल पथ का डाउन ट्रैक पूरी तरह से बाधित हो गया। इसके बाद सिंदुरवा स्टेशन पर डाउन मालगाड़ी को रोक दिया गया।
वहीं, निहालगढ़ स्टेशन पर हावड़ा-अमृतसर अप एक्सप्रेस को रोका गया। हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस करीब पौने दो घंटे विलंब से रवाना की गई। वहीं, मालगाड़ी को शाम पांच बजे के करीब रवाना किया गया। पांच घंटे तक डाउन ट्रैक बाधित रहने से ट्रेनों को अप ट्रैक से गुजारा गया। रेल पथ निरीक्षक बीएस मीना ने बताया कि निहालगढ़ व सिंदुरवा स्टेशन से टावर वैगन भेजकर डाउन ट्रैक की ओएचई लाइन को ठीक कराया गया।
इस वजह से आता चक्रवाती तूफान : मौसम वैज्ञानिक
मौसम वैज्ञानिक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि जगदीशपुर के अलावा कहीं चक्रवाती तूफान की सचना नहीं मिली है। अभी मानसून समाप्त नहीं हुआ है। वायुमंडलीय दबाव कहीं अधिक और कहीं कम होने की वजह से चक्रवाती तूफान आता है। यह तूफान वायुमंडलीय दबाव के खाली स्थान को भर देता है।