विधान परिषद में वंदे मातरम पर चर्चा में नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव ने कहा कि यह गुलामी से मुक्ति दिलाने वाली अमर गाथा है। यह सिर्फ एक राष्ट्रगीत नहीं बल्कि एक आंदोलन है। इसने सामाजिक चेतना को एक सूत्र में बांधा है। यह आजादी की लड़ाई की आत्मा है। यह किसी विचारधारा व संगठन की जागीर नहीं है।
उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि देशभक्ति का सर्टिफिकेट कोई पार्टी बांटेगी? देशभक्ति के बारे में नारे लगाने से नहीं देश के लिए काम करने से साबित होती है। आज किसान सड़क पर है, नौजवान बेरोजगार है, महंगाई आसमान छू रही है। वंदे मातरम इसकी इजाजत नहीं देता है। असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। लाल बिहारी यादव ने कहा कि सपा का साफ कहना है कि देशभक्ति दिल से जुड़ी है, डंडे व डर से नहीं।
वंदे मातरम का सम्मान है, संविधान हमारी शान है। किंतु आज संविधान खतरे में है। देश को नारे नहीं, नौकरी चाहिए, डर नहीं भरोसा चाहिए। झूंठ नहीं सच्चाई चाहिए। वहीं सपा सदस्य किरणपाल कश्यप ने चर्चा के दौरान आरएसएस पर बैन, कोडीन कफ सिरप, एसआईआर का मुद्दा उठाया, इसे लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। सपा सदस्य मानसिंह यादव ने डॉ. आंबेडकर के अपमान का मुद्दा उठाया, इस पर भी दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। वहीं अधिष्ठाता सलित विश्नोई ने उन्हें रोकते हुए सदन का माहौल न खराब करने की अपील की।