अमृत महोत्सव में घर-घर तिरंगा फहराया गया। तिरंगे की शान और सम्मान अमृत महोत्सव के बाद भी बरकरार रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। यह सब तभी होगा जब तिरंगे को उतारने के बाद पूरे सम्मान से सहेज कर रखें। शहर के सरकारी व गैर सरकारी संस्थान आगे आए हैं जो तिरंगे को सहेजने के लिए तैयार हैं। शहरवासी इन संस्थानों के पास ससम्मान तिरंगे को जमा करा सकते हैं। जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने बताया कि जिसे भी राष्ट्रध्वज को सहेज कर रखने में किसी भी प्रकार की कठिनाई है वह किसी भी सरकारी कार्यालय में उसे जमा करा सकता है। ताकि राष्ट्रध्वज को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा जा सके।
राष्ट्रध्वज को सहेज कर रखने के लिए लामार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज ने भी कदम बढ़ाया है। प्रिंसिपल आश्रिता दास ने बताया कि शहरवासी विद्यालय के कार्यालय में राष्ट्रध्वज को जमा करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल प्रशासन से व्हाट्सएप नंबर 6307609503 पर कोई भी इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि यदि राष्ट्रध्वज अच्छी स्थिति में हुआ तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने के लिए सहेज कर रखा जाएगा। यदि कटा-फटा हुआ तो उसे सम्मान के साथ डिस्पोज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस माह के अंत तक झंडे स्वीकार किए जाएंगे।
नगर निगम ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि राष्ट्रध्वज उतारने के बाद निगम में जमा किया जा सकता है। महापौर संयुक्ता भाटिया का कहना है कि तिरंगे को इधर-उधर न फेंकें। जो तिरंगे को सहेज कर नहीं रख पा रहे हैं वे इसे नगर निगम को सौंप सकते हैं। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सभी जोनल अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई जोनल कार्यालय पर आकर झंडा देता है तो वह उसे लेकर सम्मानपूर्वक रख लें। वहीं, इंडियन ऑयल कंपनी भी इस पुनीत कार्य में आगे आई है। कंपनी के राज्य प्रमुख संजीव कक्कड़ ने बताया कि कंपनी के पेट्रोल पंपों पर 19 अगस्त तक झंडा जमा किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम भी इस काम में सहयोग करेगी।
क्या है नियम: जिस तरह से झंडा फहराने के नियम हैं उसी तरह से उसके बाद रखरखाव के भी नियम हैं। झंडा उतारने केबाद उसे अपने पास अच्छे से सहेज कर सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। यदि बड़ा कपड़े का झंडा है तो उसे करीने से तह कर सम्मानपूर्वक साफ-सुथरे स्थान पर रखना चाहिए। झंडे के इस्तेमाल के बाद उसे फेंकना नहीं चाहिए। यदि झंडा कट गया या फट गया हो तो भी उसे फेंकने के बजाय सरकारी संस्थान जहां झंडे एकत्रित होते हों, उन्हें सौंप देना चाहिए।