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विदाई का तोहफा बन रह गई यूनिफॉर्म

Sun, 21 Jul 2013 01:04 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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नया सत्र शुरू हो गया है, लेकिन पैसा अभी तक नहीं आया। अभिभावक और छात्र प्रधानाचार्यों से यूनिफॉर्म की मांग रहे हैं।
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पिछले साल स्कूल यूनिफॉर्म का पैसा सत्र के अंत में आया। मार्च-अप्रैल में पैसा आया और मई तक यूनिफॉर्म बांटी गई। हालांकि, उनमें से कई बच्चे स्कूल छोड़कर चले गए।

नया सत्र शुरू हो गया है, लेकिन पैसा अभी तक नहीं आया। अभिभावक और छात्र प्रधानाचार्यों से यूनिफॉर्म की मांग रहे हैं।

लंबी है प्रकिया
इंटर कॉलेजों से संबद्ध प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों के प्रधानाचार्यों की यह समस्या बड़ी है लेकिन, अफसर इसे नहीं समझ रहे। सालभर पहनने को दी जाने वाली यूनिफॉर्म बच्चों के लिए महज विदाई का तोहफा बनकर रह गई है।
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इनकी समस्या यह है कि, पहले ये जिला विद्यालय निरीक्षक को छात्रसंख्या का ब्यौरा भेजते हैं। वहां से यह ब्यौरा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के जरिए सर्व शिक्षा अभियान को भेजा जाता है।

...और फिर हो जाती है देरी
बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में भी अक्टूबर-नवंबर तक यूनिफॉर्म का पैसा पहुंचता है। इंटर कॉलेजों से संबद्ध प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में छात्रसंख्या का ब्यौरा पहुंचने के फेर में यह पैसा आने में और देर हो जाती है।

पिछले साल यह पैसा सभी इंटर कॉलेजों में मार्च-अप्रैल तक पहुंचा। इसके बाद यूनिफॉर्म बनवाने और बंटवाने में समय लगा। कई कॉलेजों में तो मई में यूनिफॉर्म दी गई।

शुरुआती सत्र में मिले यूनिफॉर्म
क्वींस कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. आरपी मिश्र बताते हैं कि, मार्च में पिछले साल का पैसा मिला था। तभी उन्होंने यूनिफॉर्म बनवाकर बंटवा दीं। आठवीं के छात्र तो यूनिफॉर्म लेकर स्कूल छोड़कर चले गए या नौवीं में आ गए।
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हमारे कॉलेज की नौवीं की यूनिफॉर्म अलग रंग की है। छठीं और सातवीं पास करने वाले भी कई छात्र स्कूल छोड़ देते हैं। अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. जेपी मिश्र भी कहते हैं कि यूनिफॉर्म सत्र की शुरुआत में ही मिलनी चहिए।
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