प्रदेश में काफी समय से हर मंत्री विभाग में शीघ्र नौकरियों का जुमला उछाल रहा है। मगर भर्तियों के लगातार लंबे खिंचते जाने से तरह-तरह की बातें भी होती आ रही हैं।
नियम-कायदे बनाने वाले विभाग के एक अफसर ने नौकरियों का एक नया ‘फार्मूला’ बताया। अफसर के मुताबिक, चुनाव का माहौल बन ही गया है। हर दल युवा पर ही फोकस कर रहा है।
ऐसे में सरकार भी उन्हें दूसरे के पास बिलकुल नहीं छिटकने देने वाली। कुछ दिन बाद से भर्तियों के विज्ञापन निकलने शुरू होंगे। एक बार शुरू होगा तो चुनाव की घोषणा तक कोई न कोई भर्ती आती ही रहेगी।
विज्ञापन आते ही तमाम लोग नौकरी का जुगाड़ भी जरूर ढूढेंगे। यह जुगाड़ वहीं ढूढेंगे जहां से उम्मीद होगी। ऐसे में यदि लैपटॉप और बेरोजगारी भत्ते की तरह एक अदद नौकरी के लिए सरकार से जुड़ गए तो ‘बेड़ा’ पार हो जाएगा।
ये ही जगह-जगह जाकर बताएंगे लैपटॉप और बेरोजगारी भत्ता के पूरे होते वादे।..और रही बात भर्ती की तो भर्ती लिस्ट चुनाव बाद ही आ पाएगी। वजह, इस बार तीन-तीन महीने तक आवेदन करने का मौका देने की तैयारी है।
बीच में ही चुनाव घोषित हो गए तो विपक्ष वाले भर्तियों पर रोक की मांग करने लगेंगे। बिना कुछ कहे भर्तियां बंद हो जाएंगी। फिर हिसाब-किताब का मौका चुनाव बाद ही आएगा।