एक प्रमुख पार्टी के नेता, रहने वाले तो बलिया के हैं लेकिन टिकट पड़ोस के मऊ जिले की सीट से ले आए।
बताया जाता है कि भूमिहारों की अच्छी तादाद देखकर बगल वाली सीट पर लालायित हुए। मगर उनकी यही चाल उल्टी पड़ती नजर आ रही है। चर्चा है कि उन्होंने अपनी पहली शादी भूमिहारों के परिवार में ही की थी।
मगर बाद में संपत्ति के चक्कर में एक क्रिश्चियन कन्या के साथ जीवन-बसर करने लगे। क्रिश्चियन कन्या से उन्हें न सिर्फ अथाह संपत्ति ही नहीं शोहरत भी मिली। देश-परदेस की सैर का मौका मिला।
मगर अब यही बात वोट का समीकरण बिगाड़ने लगी है। सबसे ज्यादा फजीहत समर्थकों की है। वे बेचारे जैसे ही बिरादरी का हवाला देते हैं लोग उल्टे सवाल उछालने लगते हैं।
सवाल ये कि आखिर जब वह संपत्ति के चक्कर में बिरादरी की कन्या को छोड़ गए तो चुनाव जीतने पर न जाने क्या-क्या करेंगे?
लोग समझा रहे हैं कि अभी मौका है, इलाका बदलने से भले बात बन जाए, वरना बिरादरी के भीतर से ही ताल ठोंकने वाले वोटकटवा उतर आएंगे।