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पेंशन अदालत कार्यक्रम में पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, पेंशनरों को दी महत्वपूर्ण जानकारियां

Sat, 23 Nov 2019 03:59 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को पेंशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बहुत जूझना पड़ता था, अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। रक्षा लेखा मुख्यालय की ओर से कॉल सेंटर बनाया गया है।

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टोल फ्री नंबर 18001805325 पर कॉल करने से पेंशन से जुड़ी शिकायतों का तय समय में निराकरण कर दिया जाएगा। रक्षा मंत्री शनिवार को यहां छावनी स्थित सेना चिकित्सा कोर में आयोजित 172वीं रक्षा पेंशन अदालत में मुख्य अतिथि थे।

उन्होंने कहा, पूर्व सैनिकों का अभिनंदन है। यह पहला मौका है, जब कोई रक्षामंत्री पेंशन अदालत में शामिल हो रहा है। सेना, वायुसेना व नौसेना के ऑन ड्यूटी जवानों की तरह पूर्व सैनिकों का भी मैं सम्मान करता हूं। रक्षा मंत्री बनने पर सियाचिन गया और वहां देखा कि किन विपरीत परिस्थितियों में जवान ड्यूटी करते हैं।
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वहां से लौटने के बाद जवानों के परिजनों को पत्र लिखकर कहा- आप पर नाज है। गौरव की अनुभूति होती है। भारत और चीन की सीमा पर भी गया। देश जिस ऊंचाई पर है, वह जवानों की वजह से है, जो सरहद पर डटे हैं। यह शहीद अब्दुल हमीद, कैप्टन मनोज पांडेय की धरती है। सेना के जवानों के ऋण से मुक्त नहीं हो सकते।

 

भूतपूर्व सैनिकों में कुछ भी कर गुजरने का माद्दा

पेंशन अदालत पहुंचे पूर्व सैनिकों के परिजनों ने सुनाई अपनी व्यथा - फोटो : अमर उजाला
राजनाथ ने कहा कि भारत की सीमाओं पर जब भी कोई आंख उठाकर देखता है तो लोगों का राष्ट्रीय स्वाभिमान जाग जाता है और इसी से वह सेना में भर्ती होने के लिए आतुर रहते हैं। जरूरत पड़ने पर भूतपूर्व सैनिक उसी हौसले से कुछ भी कर गुजरने का माद्दा रखते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर वन रैंक वन पेंशन का मामला  निस्तारित किया गया।

वेबसाइट पर हर मर्ज की दवा
रक्षा लेखा महानियंत्रक संजीव मित्तल ने कहा कि रक्षा पेंशन अदालत इलाहाबाद ने वेबसाइट www.pcdapension.nic.in तैयार की है। इस पर पेंशन से जुड़े सभी आदेशों को अपलोड कर दिया जाता है। देश में 32 लाख रक्षा पेंशनर हैं, जिसमें प्रतिवर्ष 80 से 85 हजार नए पेंशनर जुड़ जाते हैं।

देश का रक्षा बजट चार लाख करोड़ रुपये है, जिसका 26 प्रतिशत पेंशनरों के भुगतान पर खर्च होता है। सातवें वेतन आयोग के पेंशन निर्धारण का 60 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। शेष काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

शहीद की पत्नी ने सुनाई पीड़ा
रक्षा मंत्री ने पेंशन अदालत में लगे स्टॉलों का मुआयना भी किया। इस दौरान वर्ष 2005 में बारामुला में ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए सिपाही हर्षवर्धन सिंह की पत्नी समा देवी ने अपनी पीड़ा उनसे बयां की। कहा कि उनके दो बेटे हैं। राज्य सरकार ने शहीद के परिजनों को नौकरी की घोषणा की थी, लेकिन वह पिछले कई सालों से भटक रही हैं, कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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रक्षा पेंशन अदालत में पूर्व सैनिकों और परिवारीजनों ने बयां की दिक्कतें

पेंशन अदालत में लगे कैंप में जानकारी लेते पूर्व सैनिक व आश्रित - फोटो : अमर उजाला
छलक पड़ीं सौ वर्षीय शाबुल बेगम की आंखें
रक्षा पेंशन अदालत में शामिल होने पहुंचे पूर्व सैनिक पेंशन गड़बड़ियों को लेकर परेशान नजर आए। किसी को कम पेंशन मिलने की शिकायत थी तो किसी की पेंशन ही नहीं आ रही। किसी के दस्तावेजों में गड़बड़ी की वजह से पैसा फंसा हुआ था तो किसी की डिटेल अपडेट नहीं थी। पेंशन अदालत में उनकी समस्याओं के जल्द से जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया गया।

तेलीबाग के घोसियाना निवासी सौ वर्षीय शाबुल बेगम ने रोते हुए बताया कि उनके पति सिपाही मो. अतीक की मौत हो चुकी है। वह कई तरह की समस्याओं से जूझ रही हैं। उन्हें केवल दस हजार रुपये पेंशन मिलती है, इससे काम नहीं चलता। शारदा अर्जुनन ने भी कम पेंशन मिलने की शिकायत दर्ज कराई।

रेनू ने बताया कि पेंशन रुक-रुक कर आती हैं। शांति देवी व चंद्रा देवी के पास भी यही शिकायतें थीं। सेवानिवृत्त सूबेदार हेमराज भट्ट ने बताया कि सातवें वेतन आयोग में तय हुई पेंशन का पीपीओ नहीं आया। पहले पेंशन 9,429 रुपये थी, जो घटकर 8,425 रुपये हो गई।

नौसेना से रिटायर जवान ओम प्रकाश ने बताया कि उनकी पेंशन से प्रतिमाह साढ़े तीन हजार रुपये की कटौती हो रही है। बैंक व पेंशन मुख्यालय वजह नहीं बता रहे। बलिया निवासी पाना देवी केपति ब्रिगेड ऑफ गार्ड में थे। आधार कार्ड में जन्मतिथि नहीं होने की वजह से मुख्यालय पेंशन जारी नहीं कर रहा है।


 
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