प्रदेश से रोजी-रोटी के लिए विदेश जाने वाले लोगों की तादाद वर्ष दर वर्ष घट रही है। पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक कामगार, श्रमिक व बेरोजगार 2016 में विदेश गए थे। इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट आई है। पिछले वर्ष कुछ संख्या बढ़ी भी, लेकिन वह भी 2016 तक नहीं पहुंच पाई। खास बात यह है कि काम-धंधे के लिए विदेश जाने वालों में कुशीनगर और देवरिया से ज्यादा लोग लखनऊ के हैं। यह तस्वीर सामने आई है, प्रदेश सरकार की एक रिपोर्ट में।
सरकार के एनआरआई विभाग ने अपनी वेबसाइट पर तीन भाग में यह रिपोर्ट अपलोड की है। पहले हिस्से में 2016 से वर्षवार जिलेवार विदेश जाने वालों की संख्या है। दूसरे हिस्से में किस काम-धंधे के लिए कितने लोग गए हैं, वर्षवार, जॉब रोल के साथ इसका ब्यौरा है। तीसरे हिस्से में उन 12 देशों की जानकारी है जहां ये लोग गए हैं।
रिपोर्ट में 2016 से 2019 तक कैलेंडर वर्ष के हिसाब से आंकड़े दिए गए हैं। 2020 में मार्च तक की स्थिति है। मार्च से कोविड-19 महामारी के मद्देनजर विदेश की आवाजाही रुकी हुई है। सरकार ने यह रिपोर्ट क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय लखनऊ में स्थापित प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रीयंट्स (पीओई) से प्राप्त आंकड़ों से तैयार की गई है।
इस तरह घटी विदेश जाने वालों की संख्या
वर्ष संख्या
2016 143741
2017 88429
2018 86273
2019 116251
2020 27335
(मार्च तक)
योग 4,62,029
यूएई, सऊदी अरब, ओमान और कुवैत सबसे ज्यादा जाने वाले
रिपोर्ट बताती है कि रोजी-रोटी के लिए प्रदेश से विदेश जाने वाले लोगों के लिए मुस्लिम देश पसंदीदा स्थान बने हुए हैं। सबसे ज्यादा लोग संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जा रहे हैं। इसके बाद सऊदी अरब, ओमान और कुवैत का नंबर आता है। साढ़े चार लाख से अधिक लोगों में करीब 1.20 लाख अकेले यूएई जाने वाले सामने आए हैं।
बढ़ई, ड्राइवर, पेंटर, इलेक्ट्रिशियन को ज्यादा मौका
रिपोर्ट में 272 तरह के काम चिह्नित किए गए हैं, जिसमें यहां के कामगारों को विदेश में मौका मिल रहा है। सबसे ज्यादा काम बढ़ई, ड्राइवर, जनरल लेबर, मकान बनाने वाले मिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन, पेंटर, टेक्नीशियन, रिगर, प्लंबर, हेल्पर, फिटर, स्टील फिक्सर व रसोइये का है।
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