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यूपी कैबिनेट में 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती पर फैसला, लिखित परीक्षा कराने को सरकार ने दी मंजूरी

Wed, 07 Mar 2018 10:06 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापकों की भर्ती लिखित परीक्षा से कराने के लिए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 में 22वें संशोधन को मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी गई।

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बेसिक शिक्षा विभाग में 68, 500 सहायक अध्यापकों की भर्ती लिखित परीक्षा के जरिए कराई जा रही है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लिखित कराई जा रही है तब विभाग को सहायक अध्यापकों की भर्ती लिखित परीक्षा से कराने का न तो औचित्य है और न ही सरकार को इसका अधिकार है। वहीं, विभाग का तर्क है कि टीईटी केवल पात्रता परीक्षा है। सहायक अध्यापकों की भर्ती लिखित परीक्षा से ही कराई जाएगी।

उच्च न्यायालय में दी गई चुनौती के बाद सरकार ने बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 में संशोधन का निर्णय किया। पहले विभाग में सहायक अध्यापकों की भर्ती शिक्षक भर्ती अधिनियम 1981 के नियम 8 के तहत की जाती थी। विभाग ने नियमावली में संशोधन करते हुए नियम 14 के तहत लिखित परीक्षा से भर्ती कराने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा, जिसे हरी झंडी मिल गई।

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सीएनजी की कीमत 3.50 रुपये प्रतिकिलो होगी कम

- फोटो : amar ujala
प्रदेश सरकार ने ‘कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस’ (सीएनजी) बनाने में इस्तेमाल होने वाली नेचुरल गैस पर लगने वाले ‘मूल्य संवर्धित कर’ (वैट) की दरें संशोधित कर दी हैं। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इसके बाद सीएनजी तैयार करने में नेचुरल गैस के उपयोग पर अब 5 प्रतिशत ही वैट देना होगा। पहले यह दर 21 प्रतिशत थी।

इससे पहले 9 जनवरी को नेचुरल गैस को छोड़कर कैबिनेट ने सीएनजी में प्रयोग होने वाले अन्य करयुक्त वस्तुओं पर वैट दरें घटाई थीं। सरकार के इस फैसले से सीएनजी में इस्तेमाल होने वाले नेचुरल गैस की कीमत में भी करीब 3.50 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आएगी।

दरअसल, जीएसटी से बाहर होने के कारण प्रदेश में सीएनजी पर वैट लागू है। इस संबंध में वाणिज्यकर विभाग ने नेचुरल गैस से भी वैट घटाने का प्रस्ताव तैयार किया था, ताकि सीएनजी तैयार करने में उपयोग होने वाले सभी कर योग्य वस्तुओं पर लगने वाले वैट को एक समान किया जा सके।

श्रम विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को दी मंजूरी

इसके अलावा, प्रदेश सरकार ने मंगलवार को श्रम विभाग से जुड़े दो अलग-अलग प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसमें 10 वर्ष के लिए कारखाने का लाइसेंस मिलने और प्रवासी कर्मकारों के ठेकेदार को 24 घंटे में लाइसेंस देना शामिल है। सरकार के इस फैसले से निवेशकों को सहूलियत होगी और श्रमिकों के हितों का संरक्षण हो सकेगा।

शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कारखाना नियमावली में संशोधन के साथ ही यूपी ने ईज ऑफ डुइंग बिजनेस के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2017 के लिए प्रस्तावित सभी 119 श्रम सुधारों को लागू कर दिया गया है। प्रदेश ने तय समय सीमा में रिकार्ड 118 सुधार लागू किए थे। इसी आधार पर 2017 की ईज ऑफ डुइंग बिजनेस में प्रदेश की रैंकिंग हो रही है। कारखाना अधिनियम में संशोधन कर 119 वां श्रम सुधार भी लागू करने को मंजूरी दे दी है। अधिकारी ने बताया कि यूपी ने श्रम सुधारों को लेकर देश में सबसे ज्यादा काम किया है।

ये हैं दोनों फैसले

- फोटो : amar ujala
फैसला-1 : प्रदेश कैबिनेट ने यूपी कारखाना नियमावली-1950 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसमें कारखाने का लाइसेंस व नक्शा पास करने की व्यवस्था दी गई है। वर्तमान में लाइसेंस पांच वर्ष के लिए दिया जाता है लेकिन सरकार अब 10 साल का लाइसेंस देगी। इसके अलावा नक्शा पास करने से लेकर लाइसेंस देने की पूरी व्यवस्था तय समयसीमा में पूरी करनी होगी।

सामान्य कारखानों के लिए 15 दिन में लाइसेंस दिया जाएगा। खतरनाक श्रेणी के कारखानों के लाइसेंस की मंजूरी 30 दिन में दी जाएगी। तय समयसीमा में लाइसेंस व नक्शा न जारी करने पर ये स्वत: पास (डीम्ड अप्रूव्ड) मान लिए जाएंगे।

फैसला -2: प्रदेश कैबिनेट ने श्रम विभाग के प्रस्ताव पर अंतर्राज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन एवं विनियमन और सेवा शर्त) अधिनियम-1979 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत प्रवासी कर्मकार (श्रमिक) को नियोजित (काम लेने वाले) करने वाले प्रत्येक ठेकेदार को श्रमिक से सेवा लेने से पहले रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस की मंजूरी लेने की अनिवार्यता है।

सरकार ने आवेदन के 24 घंटे के भीतर रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस देने की अनुमति देने व्यवस्था कर दी है। अभी तक इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं थी। इसके अलावा यदि 24 घंटे में मंजूरी नहीं दी जाती है तो रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस मंजूर मान लिया जाएगा। इसके लिए डीम्ड अप्रूवल की व्यवस्था भी कर दी गई है। आवेदन से मंजूरी तक की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होगी।

प्रदेश में प्राइवेट मंडियां स्थापित करने का रास्ता साफ

प्रदेश में जल्द ही निजी क्षेत्र को मंडी स्थापित करने के लिए लाइसेंस मिलने लगेगा। इसके लिए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम-1964 में संशोधन के प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी है। इसके तहत कोल्ड स्टोरेज को उप मंडी स्थल का दर्जा मिलने के साथ ही यह व्यवस्था भी है कि मंडी समितियां विकास कार्यों के लिए अपने पास 10 करोड़ रुपये तक की राशि रोक सकेंगी। हालांकि, यह प्रस्ताव विधान मंडल में पास होने के बाद ही लागू होंगे।

किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलाने और माल की आसानी से बिक्री के लिए राज्य सरकार ने अधिकाधिक मंडियों को लाइसेंस देने का फैसला किया है। निजी प्लेयर्स के लिए भी यह क्षेत्र खोलने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने कोल्ड स्टोरेज को उप मंडी स्थल का दर्जा देने के लिए एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इससे किसानों और व्यापारियों को करों में काफी छूट मिल सकेगी।

कैबिनेट ने मंडी समितियों को वित्तीय दृष्टि से और अधिक मजबूत करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। अभी तक मंडी समितियां अपनी आय में से अधिकतम 25 लाख रुपये ही अपने पास रोक सकती हैं। शेष राशि उन्हें मुख्यालय को भेजनी होती है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, मंडी समितियां अपनी आय की 50 फीसदी राशि या 10 करोड़ रुपये में से जो भी कम हो, उसे अपने पास रख सकेंगी।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इससे मंडी समितियां तेज गति से विकास कार्य करा सकेंगी। पहले से स्थापित मंडी समितियों के लोकतांत्रिकरण की व्यवस्था भी की गई है। नियमित चुनाव के साथ-साथ समितियों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों से भरवाया जाएगा बांड

शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बेपटरी हो चुकी चिकित्सा सेवा को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला किया है। अब उन छात्रों के लिए दो साल तक सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज करना अनिवार्य कर दिया गया है, जो सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई पूरी करेंगे। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। प्रस्ताव के मुताबिक प्रवेश के समय ही छात्रों से दो साल की सेवा का बांड भरवाया जाएगा।

प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज या विश्वविद्यालय में एमबीबीएस, बीडीएस, एमडी व एमएस, किसी स्नातकोत्तर व पीजी डिप्लोमा कोर्स और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों से सरकार दो साल का बांड भरवाएगी। इसमें यह अनिवार्य किया गया है कि संबंधित कोर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे शासकीय सेवक की तरह दो साल तक ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देंगे। बांड के तहत मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को सीएचसी तथा पीएचसी में अपनी सेवा अनिवार्य रूप से देनी होगी।

बांड तोड़ने पर 20 लाख से 1 करोड़ तक हर्जाना
किसी कोर्स में प्रवेश लेने से पहले भरवाए जाने वाले दो साल के बांड का उल्लंघन करने पर छात्रों से भारी हर्जाना वसूला जाएगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने बताया कि बांड की शर्तों के मुताबिक एमबीबीएस व बीडीएस समेत स्नातक कोर्स के लिए 20 लाख, पीजी डिप्लोमा कोर्स केलिए 30 लाख, पीजी डिग्री कोर्स के लिए 40 लाख और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स के छात्रों को बांड की शर्त तोड़ने पर 1 करोड़ रुपये चुकाने होंगे।

अब तक यह थी व्यवस्था
अब तक की व्यवस्था में यह शर्त सिर्फ उन एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों के लिए थी जो सरकारी सेवा में चयन होने केबाद एमडी या एमएस करना चाहते थे। दरअसल, इन डॉक्टरों को सरकारी खर्च पर स्नातकोत्तर कोर्स कराया जाता है। इसलिए सरकार उनसे एक साल का बांड भरवाती थी।

इसमें शर्त थी कि वे एमडी या एमएस करने के बाद एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में अनिवार्य रूप से अपनी सेवाएं देंगे। सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है।

चंदौली में गन्ना किसान संस्थान की जमीन संस्कृति विभाग को दी

- फोटो : amar ujala
मंत्रिपरिषद की बैठक में चंदौली में पड़ाव चौराहे के निकट गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र की पूरी जमीन पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मूर्ति स्थापना, मेमोरियल ब्लॉक एवं वैदिक उद्यान के लिए संस्कृति विभाग को निशुल्क दी जाएगी। यह फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया गया।

गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केंद्र की भूमि का कुल रकबा 3.674 हेक्टेयर है। इसमें 1.404 हेक्टेयर भूमि पर बना गन्ना प्रशिक्षण केंद्र जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 10 जनवरी को हुई बैठक में इस संस्थान को अन्यत्र स्थानांतरित करने पर सहमति बनी थी। इस भूमि पर पं. दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति, मेमोरियल ब्लॉक एवं वैदिक उद्यान की स्थापना प्रस्तावित है।

पहले किसान संस्थान की रिक्त पड़ी 2.270 हेक्टेयर भूमि पर दीनदयाल की मूर्ति व मेमोरियल ब्लॉक की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता का प्रस्ताव भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय को भेजा गया था। भारत सरकार ने इस परियोजना के लिए 39.75 करोड़ रुपये दिए जाने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है।

अब तय हुआ कि इस परियोजना के लिए गन्ना प्रशिक्षण संस्थान की संपूर्ण भूमि 3.674 को संस्कृति विभाग को निशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। अब संस्कृति मंत्रालय को संशोधित प्रस्ताव भेजा जाएगा। किसान संस्थान को अन्यत्र शिफ्ट करने पर भूमि की उपलब्धता राजस्व विभाग या राज्य सरकार के किसी अन्य महकमे से कराई जाएगी। इसके निर्माण के लिए सरकार वित्तीय सहायता देगी।
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सेकी से खरीदेंगे सोलर प्लांट से बनी बिजली

प्रदेश में सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) के माध्यम से सोलर प्लांट से बनी बिजली 2.55 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। रोज अधिकतम 750 मेगावॉट बिजली खरीदने के लिए सेकी और पावर कॉर्पोरेशन के बीच होने वाले पावर सेल एग्रीमेंट में सरकार गारंटी देगी।

पावर सेल एग्रीमेंट के लिए कैबिनेट में सरकार की ओर से शासकीय गारंटी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सेकी की ओर से सोलर मिशन फेज-3 और फेज-4 के तहत राजस्थान में दो सोलर एनर्जी पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन दोनों पार्क से उत्पादित बिजली में से अधिकतम 750 मेगावॉट बिजली 2.55 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगा।
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