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2.36 लाख करोड़ के कर्ज तले दबे हैं अखिलेश

Wed, 02 Jul 2014 10:14 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश के बजट में विकास के लिए करोड़ो की घोषणाएं करने वाले मुख्यमंत्री शायद कर्ज की बात भूल गए थे, वहीं विपक्षी दल भी इस पर चुप ही हैं।
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प्रदेश पर केंद्र सरकार और वित्तीय संस्थाओं का 2,36,795.29 करोड़ रुपये का कर्ज है। मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी राज्यमंत्री फरीद महफूज किदवई ने भाजपा के सुरेश कुमार खन्ना के एक सवाल के जवाब में दी।

किदवई ने बताया कि वर्ष 2013-14 में कर्ज पर देय ब्याज की अदायगी के लिए 17,054.54 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी।

महालेखाकार द्वारा भेजे गए प्रारंभिक लेखों के अनुसार 14,935.85 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। उन्होंने बताया कि विकास के लिए ऋण लेकर शर्तों के अनुसार उसकी अदायगी की जाती है।
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वैट मुक्‍त नहीं होगा सीएफएल

वहीं सरकार ने विधानसभा में कहा कि सीएफएल को वैट से मुक्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। विपक्ष के लोगों ने प्रदेश में वैट लागू किया था और जो दरें तय की गई थीं वही प्रभावी हैं।

राष्ट्रीय लोकदल के दलवीर सिंह के एक सवाल के जवाब में प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा ने यह जानकारी दी।

दलवीर सिंह का कहना था कि गरीब से लेकर अमीर तक सीएफएल का इस्तेमाल करते हैं। इसे वैटमुक्त कर दिया जाए तो गरीब और मध्यम वर्ग को फायदा होने के साथ-साथ बिजली की खपत में भी कमी आएगी।

मंत्री ने दूसरे राज्यों में सीएफएल पर वैट की दरों का तुलनात्मक ब्यौरा देते हुए कहा कि फिलहाल इसे वैट से मुक्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
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मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठा

इसके अलावा सपा के देवेन्द्र प्रताप सिंह ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में शिक्षकों की कमी का मामला उठाया। कहा कि 30 जून को सात प्रोफेसर सेवानिवृत्त हो गए। इनमें चार विभागाध्यक्ष हैं।

अक्टूबर तक तीन प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष और सेवानिवृत्त हो जाएंगे। शिक्षकों की कमी से मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में पड़ सकती है।

देवेन्द्र प्रताप सिंह ने ही आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अधिकारियों द्वारा गोरखपुर विकास प्राधिकरण में गंभीर अनियमितताओं में आरोपित अधिकारियों को अन्यत्र हटाए जाने के संबंध में गलत उत्तर देने पर विशेषाधिकार हनन की सूचना दी।

सभापति गणेश शंकर पांडेय ने शासन को निर्देश दिया कि प्रकरण की जांच कराकर सदन को अवगत कराएं।
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