सुबह से पोस्टमार्टम के इंतजार में दोनों ही परिवार के लोग बैठे थे। कई बार पूछने पर भी पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों व अधिकारियों ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। दिन भर गुमराह किया गया। शाम करीब 7:30 बजे परिजनों को अगले दिन आने की बात कही गई। परिजनों का आरोप है कि पहले ही अगर उन्हें बता दिया गया होता तो उन्हें दिक्कत न होती
प्रियंका के पिता व अन्य।
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सीएमओ की ओर से तीन डॉक्टरों का पैनल गठित किया गया था। तीनों चिकित्सकों को पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, पैनल ने दोनों ही प्रकरण गंभीर बताकर वरिष्ठ चिकित्सकों से पोस्टमार्टम कराने की बात कही। इसके बाद दोबारा परामर्श मांगा गया। काफी देर तक इस पर विचार विमर्श होता रहा। आखिरी में कहा गया कि गठित पैनल ही पोस्टमार्टम करेगा। यह सब होते-होते रात हो गई। दिन में शवों का पोस्टमार्टम कराने की बात कहकर परिजनों को लौटा दिया गया।
बुधवार को पोस्टमार्टम के लिए शवों की संख्या ज्यादा हो गई थी। इसकी वजह से दोनों शवों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। बृहस्पतिवार को डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जाएगा।- डॉ. एनबी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी