रेल का किराया बढ़ाए जाने के विरोध में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका।
कुछ देर बाद ही लैपटॉप, कन्या विद्याधन और बेरोजगारी भत्ता स्कीम खत्म किए जाने के विरोध में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाना शुरू कर दिया।
अंदर विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था और बाहर संग्राम छिड़ा हुआ था। जम कर पत्थर चले।
पुलिस मूकदर्शक बनी रही और कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे के सिर फोड़े कई राहगीर भी चोटिल हो गए।
प्रदेश में बिजली संकट और महिलाओं पर अत्याचार के मुद्दे पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू किया।
प्रदर्शन इस कदर उग्र हो गया कि कार्यकर्ताओं ने विधानभवन की दीवार तक पर चढ़ना शुरू कर दिया।
पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी, आंसू गैस के गोले दागे। जवाब में युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हमला बोल दिया। जो हाथ में आया उससे पुलिस पर वार किया। कई लोगों को अस्पताल पहुंचे।
10 दिन के अंदर हुई ये दोनों घटनाएं प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी एक बड़ा सवाल हैं।
पुलिस, प्रशासन और खुफिया अमन और चैन के लिए जिम्मेदार ये तीनों एजेंसियों के जिम्मेदार आखिर हैं कहां।
विधानसभा के सत्र चल रहा है, विधान भवन के सामने धारा-144 लागू है, इसके बावजूद बिना इजाजत धरना-प्रदर्शन धड़ल्ले से हो रहे हैं।
विधानसभा मार्ग पर अमूमन दोपहर को होने वाले इस दंगल की वजह से आसपास के इलाकों में जाम की स्थिति बन जाती है।
आम लोगों को इस पूरे घटनाक्रम से कोई परेशानी नहीं हो इसकी जवाबदेही शायद किसी की नहीं होती।
संकरे रास्तों में ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया जाता है। स्कूल से घर लौट रहे भूखे प्यासे बच्चे जाम का शिकार बनते हैं।
कई बार एंबुलेंस भी इस जाम का शिकार होती है। मरीज के परिवारीजनों की जान सांसत में रहती है।
प्रशासन को इस बात की फिक्र नहीं होती कि जाम में फंसे बच्चे और महिलाओ की हालत बिगड़ी तो जवाबदेही किसकी होगी। न पहले से कोई इंतजाम किए जाते हैं।
दो टकराव में 75 लोग घायल
केवल 10 दिन में हुए इन दो टकराव में पुलिसकर्मी, भाजपा और सपा के कार्यकर्ता मिलाकर 75 लोग घायल हुए। जिनमें अनेक को गंभीर चोटें आईं। तस्वीरें नजारों की बयान हैं।
जिनमें कहीं पुलिस कार्यकर्ताओं को तो कहीं कार्यकर्ता पुलिस को घेर अंधाधुंध लाठियां बरसा रहे हैं।
खतरनाक तरीके से पथराव किया जा रहा है। ऐसे में एक खतरनाक वार अगर शरीर के किसी नाजुक हिस्से पर पड़ जाए तो बेवक्त मौत का खतरा भी हो सकता है।
इतने खतरनाक हालात को भी लगातार हल्के में लिया जा रहा है। पुलिस, प्रशासन और खुफिया विभाग तीनों ही लाचार नजर आ रहे हैं और विधानसभा मार्ग अराजकता का गढ़ बनता जा रहा है।
कोप भवन यहां नहीं मगर प्रदर्शन इसी सड़क पर
जब से पुराने धरनास्थल की साइट पर मुख्यमंत्री के नए सचिवालय के निर्माण का आगाज किया गया है, तब से धरना प्रदर्शन पर यहां जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है।
गोमती के किनारे लक्ष्मण मेला पार्क को बतौर धरना स्थल प्रशासन ने चुना। मगर नगर विकास विभाग ने इसकी अनुमति नहीं देता है।
प्रमुख सचिव नगर विकास की ओर से कहा गया कि, गोमती के किनारे यह स्थान पौधरोपण के लिए उपयुक्त है। यहां धरना प्रदर्शन इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि, गोमती का किनारा है।
प्रदर्शनकारियों के डूबने का भी खतरा है। ऐसे में अब झूलेलाल पार्क को एक नये विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
आमतौर से आंदोलनकारी चाहते हैं कि, धरना विधानसभा मार्ग पर ही हो। मगर प्रशासन और आम जनता लगातार इसका विरोध कर रही है।