खास बात है कि यह पत्र राज्य सभा के जनरल सेक्रेटी की सहमति के बाद जारी किया गया। यह पत्र लेकर जब बेटी व परिवार केजीएमयू पहुंचे तो वहां उन्हें सीधे दाखिले की व्यवस्था से ही इन्कार कर दिया गया। अब शहीद की बेटी राज्यसभा सचिवालय से जारी पत्र लकर कभी केजीएमयू तो कभी सैनिक कल्याण बोर्ड में चक्कर काट रही है। उसका यह भी सवाल है कि जब एडमिशन की व्यवस्था नहीं है तो पत्र क्यों जारी किया।
नीट परीक्षा परिणाम के बाद डीजीएमई की काउंसलिंग के जरिए एमबीबीएस में एडमिशन होता है। कुलपति को सीधे एडमिशन करने का अधिकार नहीं है। - प्रो. एमएलबी भट्ट, कुलपति केजीएमयू