चंद्रहास मिश्रा अपने पिता की दुकान पर बैठे थे, उनके मकान मालिक का लड़का वहां आकर लड़कियों से छेड़छाड़ करने लगा। चंद्रहास ने मना किया तो वह उन्हें ‘किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ने’ की धमकी देकर चला गया।
दो दिन बाद वो एक बाल्टी में पांच लीटर एसिड लेकर आया और उन पर डाल दिया। उनका शरीर बुरी तरह जल गया। पुलिस ने केस दर्ज किया आरोपी जेल गया। लेकिन छह महीने बाद हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गयी।
चंद्रहास आज भी केस लड़ रहे हैं, उन्हें सरकार ने अब तक काई मदद नहीं दी है। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है, कहते हैं कि सिर्फ महिलाएं ही एसिड अटैक की शिकार नहीं होती, 30 प्रतिशत पुरुष भी इसके शिकार हैं।
प्रदेश सरकार सिर्फ महिलाओं को मदद देकर भेदभाव कर रही है। एक होटल में बृहस्पतिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में चंद्रहास ने अपने संघर्ष को इन शब्दों में व्यक्त किया। उनके साथ मेरठ से 11 और एसिड अटैक पीड़ित पुरुष भी जुड़ चुके हैं।