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यूपी: डाटा सेंटर पॉलिसी से 75 हजार करोड़ रुपये का निवेश और 75 हजार को रोजगार देने का लक्ष्य

Sat, 03 Aug 2019 06:57 PM IST
ishwar ashish महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश सरकार ने डाटा सेंटर पॉलिसी का मसौदा तैयार कर लिया है। इस सेक्टर में 75 हजार करोड़ रुपये निवेश लाकर प्रदेश में 75 हजार से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का लक्ष्य तय किया गया है। प्रस्तावित नीति में डाटा सेंटर पार्क स्थापित करने पर निवेशकों को वित्तीय रियायतें व सुविधाएं देने का प्रस्ताव है। सरकार 500 मेगावाट का डाटा केंद्र व 10 हजार एकड़ में सोलर पार्क की स्थापना करना चाहती है।

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डाटा सेंटर से जुड़ी नीतियां तैयार करने के लिए आंध्र प्रदेश व तेलंगाना की नीति का अध्ययन किया गया है। प्रस्तावित नीति में डाटा सेंटर पार्क व डाटा सेंटर इकाई के लिए सरकारी संस्थाओं से ली जाने वाली जमीन पर सर्किल रेट पर 25 प्रतिशत की छूट का प्रस्ताव है।

इसके अलावा फ्लोर एरिया अनुपात में छूट दी जाएगी। जमीन की कीमत अदा करने के लिए चरणबद्ध तरीके से 10 वर्ष का समय देने का प्रस्ताव है। इसी तरह खरीदी गई या पट्टे पर ली जाने वाली जमीन पर 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी व इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 20 वर्ष तक शत-प्रतिशत छूट देने की योजना है।
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सरकार निवेश के शुरुआती पांच वर्ष एसजीएसटी की 100 प्रतिशत तथा इसके अगले पांच वर्ष तक 60 प्रतिशत प्रतिपूर्ति करने पर विचार कर रही है। डाटा सेंटर पार्क को दो ग्रिड से बिजली उपलब्ध कराने की योजना है ताकि प्राकृतिक आपदा में बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो।

सौर ऊर्जा का बढ़ावा देने का प्रस्ताव

नीति के तहत एकीकृत ग्रीन हाउस डाटा सेंटर पार्क के विकास में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। न्यूनतम 50 एकड़ में डाटा सेंटर पार्क की स्थापना की योजना है। इसके उपयोग के लिए इसी कैंपस में सोलर पार्क की स्थापना भी होगी। इसके लिए भी सहूलियतें दी जाएंगी।

सरकार ने एक लाख वर्गफीट क्षेत्रफल में डाटा सेंटर यूनिट की स्थापना को भी मंजूरी देने का प्रस्ताव किया है। इसमें सर्वर के लिए 25 प्रतिशत क्षेत्र सुरक्षित रहेगा। सूत्रों ने बताया कि इन प्रस्तावों को जल्द ही कैबिनेट में विचार-विमर्श के लिए रखने की योजना है। इन पर अंतिम फैसला कैबिनेट ही करेगी।

क्या है डाटा सेंटर
यह नेटवर्क से जुड़े हुए कंप्यूटर सर्वर का एक बड़ा समूह है जो कि बड़ी मात्रा में डाटा के भंडारण, प्रसंस्करण या वितरण के लिए संस्थाओं द्वारा उपयोग किया जाता है। प्रदेश में फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब व जीमेल आदि के करीब 4 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के जरिए करीब 20 करोड़ लोगों का आधार कार्ड बन चुका है।

बैंकिंग, खुदरा व्यापार, स्वास्थ्य सेवा, यात्रा, पर्यटन व अन्य तरह के ट्रांजेक्शन इसके अलावा हैं। डाटा के व्यापार से एमेजान, एप्पल, गूगल, फेसबुक व माइक्रोसॉफ्ट आदि वित्तीय रूप से दुनिया की सबसे सुदृढ़ कंपनियां बन गई हैं।

राज्य की 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर नई पहल

शासन के एक अधिकारी बताते हैं कि सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले 5 वर्ष में दस खरब डॉलर (एक ट्रिलियन डॉलर) पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार इस नीति के जरिए एक नए सेक्टर में आर्थिक विकास की संभावनाओं पर काम के लिए कदम बढ़ा रही है।

सरकार साझेदारी, सहयोग और अनुकूल पॉलिसी के जरिए प्रदेश में एक ऐसे ईको सिस्टम की स्थापना करना चाहती है जो राज्य में विश्वस्तरीय डाटा केंद्र स्थापित करने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहित करता हो। इससे लगातार बढ़ रहे डाटा का सुरक्षित प्रबंधन होगा और युवाओं के लिए रोजगार के सृजन का एक नया सेक्टर बनेगा जो अर्थव्यवस्था को गति देने वाला होगा।

डाटा के स्रोत
व्यक्तिगत जानकारी, फ्रिंगर प्रिंट, रेटिना
डिटाइजेशन व कंप्यूटराइजेशन
व्यक्तिगज सामाजिक जानकारी
व्यक्तिगत राजनीतिक अभिमत
धार्मिक प्रवृत्ति और रुझान

खाद्य, फोटो, जीवनशैली
ऑडियो विजुअल सृजनशीलता
पेशेवर व व्यावसायिक सूचना
बैंकिंग, क्रय-विक्रय रुझान, ई-कॉमर्स
रोग निदान, झुकाव व्यवस्था
पर्यटन व प्रौद्योगिकी
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ये हैं लक्ष्य

75 हजार करोड़ से अधिक का निवेश
75 हजार से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार
2 करोड़ टेरा बाइट डाटा स्टोर करने की क्षमता
डाटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग आदि में निवेश व रोजगार सृजन

डाटा सेंटर उद्योग के योगदान से सरकारी राजस्व में वृद्धि
यूजर्स के उपयोग से उत्पन्न डाटा का भारतीय सीमा में संरक्षण डिजिटल इंडिया के तहत ई-गवर्नेंस सेवाओं की सहज पहुंच के लिए क्लाउड आधारित एप्लीकेशन सेवाओं को बढ़ाना।

इलेक्ट्रिक वाहन व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति का भी मसौदा तैयार
प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति का मसौदा भी तैयार किया है। इन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ एक बार चर्चा हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कुछ सुझावों के साथ इसे अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं।

आने वाले दिनों में इन नीतियों को भी कैबिनेट से मंजूरी दिलाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा राजस्व परिषद ने शासन को काश्तकारों के खसरे को ऑनलाइन करने व खतौनी के नए प्रारूप को लागू करने का प्रस्ताव भेजा है। इन प्रस्तावों का परीक्षण हो रहा है। इन पर भी कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी।
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